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धारचूला पर ध्यान क्यों नहीं सरकार
कृष्ण गर्व्याल/धारचूला
Updated Sun, 07 Jul 2013 11:19 AM IST
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पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में आई आपदा गढ़वाल की त्रासदी की अपेक्षा भले ही छोटी हो लेकिन इससे निपटने में भी प्रशासनिक कौशल धरा का धरा रह गया। सरकारी तंत्र इस इम्तिहान में फेल हो गया है।
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यहां रसोई गैस, केरोसिन, राशन और सब्जियां सब कुछ समाप्त हो गया है। यहां तक की बच्चों के लिए दूध भी नसीब नहीं हो पा रहा है। धारचूला क्षेत्र में 16 जून से सड़क बंद है। प्रशासन न तो सड़क ही खोल पाया और न ही यहां के लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही कर पाया।
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लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ है। यहां न तो रसोई गैस पहुंच पा रही है और न ही केरोसिन ही बचा है। पेट्रोल और डीजल भी खत्म हो चुका है। पेट्रोल यदि है तो सिर्फ वीआईपी कोटे के लिए और कालाबाजारी के लिए। लोग 180 रुपये लीटर तक पेट्रोल खरीद रहे हैं।
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बाजार में सामान खत्म
बाजार में चावल, आटा, दालें और चीनी नदारद है। अब सब्जियों की दुकानें भी खाली हो गई हैं।। एक दो दुकानों में कुछ सब्जियां बची भी है तो उनके दाम आसमान छू रहे हैं। प्याज 120, टमाटर 100 और बैगन 60 रुपये किलो बिक रहा है। लोग अब बचीखुची स्थानीय सब्जियों पर आश्रित हो गए हैं। आलू, राई, जंगली फर, काफर आदि स्थानीय सब्जियों के सहारे दिन गुजार रहे हैं।
21 दिन के बाद केएमवीएन के एमडी दीपक रावत को अब याद आ रही है कि रसोई गैस सिलेंडरों को छोटी गाड़ियों के बाद ढुलान के जरिए धारचूला तक पहुंचाया जाएगा। इससे पहले यह सब क्यों नहीं सोचा गया।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक नबियाल और बीडीसी सदस्य हरीश गुंज्याल का कहना है कि सरकारी अमला लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा है। और शहर में ही लोगों के सामने दिक्कतें बढ़ गई है।
हेलीकॉप्टर का विकल्प क्यों नहीं?
लोग पूछ रहे हैं कि रोड बंद होने के बाद आखिर क्यों जरूरी सामग्री को धारचूला तक पहुंचाने के लिए कोई रोडमैप नहीं बनाया गया? एडवोकेट राजेंद्र कुटियाल कहते हैं कि जब हेलीकॉप्टर के जरिए निर्माण सामग्री भी भेजी जाती है, तो रसोई गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामग्री को इस माध्यम से क्यों उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।
उधर, आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्या ने कहा कि अगर जरूरी हुआ, तो मौसम ठीक होने पर हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा।
नौ दिन से डंप पड़ा है 40 क्विंटल राशन
प्रशासनिक ढिलाई और बिगड़े मौसम ने आपदाग्रस्त इलाकों में राहत कार्य पर असर डाला है। बचाव और राहत कार्यों को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। मुनस्यारी हेलीपैड में मल्ला जोहार भेजने के लिए यहां रखा गया 40 क्विंटल राशन 28 जून से डंप पड़ा है।
भारी बारिश की वजह से मुनस्यारी को मल्ला जोहार से जोड़ने वाले पुल और पैदल रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस वजह से इन इलाकों में खाद्यान्न का जबर्दस्त संकट पैदा हो गया है।
प्रशासन ने इन इलाकों को रसद सामग्री पहुंचाने के लिए जरूरी चीजें मुनस्यारी हेलीपैड में जमा तो कर दी है। पर अब इन्हें बंटवाना चुनौती बन गया है। यहां करीब 40 क्विंटल खाद्यान्न सामग्री एकत्र हो गई है।
क्या कहतें हैं अधिकारी
मुख्य विकास अधिकारी डा.राघव लंगर का कहना है कि मौसम खराब होने से हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। अब मजदूरों के जरिए पिल्थी गाड़, रालम और बुर्फू को राशन भेज दिया गया है। सीडीओ ने बताया कि प्रशासन को अभी तक आपदा से प्रभावित हुए लोगों की सही जानकारी नहीं मिल सकी है। इसी को ध्यान में रखते राजस्व विभाग की टीम भी मल्ला जोहार क्षेत्र को रवाना कर दी गई है।