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कौन बचाएगा बदरीनाथ में फंसे इन 250 लोगों को?
गंगा प्रसाद उनियाल
Updated Wed, 03 Jul 2013 02:11 AM IST
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सरकार की मानें तो बदरीनाथ में आपदा में फंसे सभी यात्रियों को मंगलवार को निकाल लिया गया है। बचाव कार्य समाप्त हो गया है। जबकि सच्चाई दावों को झुठला रही है।
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अभी भी करीब सौ यात्री और लगभग 150 स्थानीय लोग बदरीनाथ में फंसे हैं और अपनों के संपर्क में हैं। उनमें हल्द्वानी से गए 19 यात्रियों का जत्था खुद को निकाले जाने की प्रतीक्षा में बेहाल है।
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सेना ने मंगलवार को जोशीमठ में बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि बदरीनाथ से सभी यात्रियों को निकाल लिया गया है और वहां अब एक भी यात्री नहीं है। जबकि यह दावा सच्चाई से परे है।
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हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा से 18 लोगों का टूर लेकर 13 जून को बदरीनाथ के लिए निकले कांति बल्लभ पांडे ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि वह पिछले 18 दिनों से बदरीनाथ में फंसे पड़े है। 14 को वह बदरीनाथ धाम पहुंचे।
15 को मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्हें 16 जून को लौटना था। 15 की रात को हुई भीषण बारिश में बदरीनाथ और जोशीमठ के बीच गोविंदघाट में सड़क टूटने से वह वहीं फंस गए।
बदरीधाम में काली कमली धर्मशाला में अपने ग्रुप के साथ ठहरे पांडे के अनुसार उनके साथ गए ग्रुप में अधिकांश लोग 65 से 80 साल के बुजुर्ग हैं।
वह बदरीनाथ में बनाए गए हैलीपैड में रोज लाइन में इस आशा के साथ खड़े रहते हैं कि उन्हें आज तो निकाल ही लिया जाएगा किंतु रोज ही उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
उनके साथ कई बुजुर्ग अस्वस्थ भी हो चले हैं। हालात यह हैं कि कहीं भंडारा लग गया तो वह खाना खा लेते हैं वरना तो उनका भगवान ही मालिक है।
सेंट थेरसा का छात्र मनीष भी शामिल
सेंट थेरेसा स्कूल का कक्षा नौ का छात्र मनीष पाठक भी इस ग्रुप के साथ फंसा है। वह अपनी नानी गीता पंत के साथ यात्रा पर गया था। मनीष पाठक से जब अमर उजाला ने फोन पर बात की और उसे दिलासा दिया कि कल उनको निकाल लिया जाएगा तो उसे भरोसा नहीं हो रहा था।
हल्द्वानी से गए दल के सदस्य
गीता पंत (65) साल, मनीष पाठक (14), जानकी कोठारी(60), धर्मानंद पांडे(80), देवकी पांडे(70), लीला बुधलाकोटी(70), तारादत्त जोशी(80), किशन चंद सुनारी(68), जीवंती दानी(80), भरत पांडे(16), कांति बल्लभ पांडे(17), हरीश पांडे(52), प्रकाशचंद्र जोशी(32), प्रभु पांडे(14) तथा पांच अन्य लोग।