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160 नाबालिग लड़कियों की दर्दनाक 'कहानी'

Mon, 26 Aug 2013 07:56 PM IST
अमर उजाला, ओमप्रकाश सती, हल्द्वानी
अमर उजाला, ओमप्रकाश सती, हल्द्वानी Updated Mon, 26 Aug 2013 07:56 PM IST
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where are 160 minor girls

उत्तराखंड में इन दिनों पुलिस को एक सवाल बेहद परेशान किए हुए है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 160 लडकियां रहस्यमयी ढंग से पिछले कुछ दिनों में गायब हो गई हैं।

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उत्तराखंड से 160 नाबालिग बच्चियां रहस्यमयी ढंग से गायब हो गई हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह बच्चियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए राज्य से बाहर भेज दी गई हों।
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160 नाबालिग लड़कियां

आपदा में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से लापता करीब 160 नाबालिग लड़कियों का पता नहीं लग पा रहा है। दो माह बाद भी किसी का शव बरामद नहीं हुआ है।

जांच में जुटी पुलिस
ऐसे में उनके बड़ी संख्या में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए बाहर निकल जाने की आशंका बढ़ गई है। पुलिस और कई एनजीओ लगातार इसकी जांच में जुटे हैं।

पुलिस मुख्यालय के आपदा सेल के आंकड़ों के अनुसार करीब 400 नाबालिग लड़के भी दोनों मंडलों से लापता हैं। विभिन्न थानों में इनकी गुमशुदगी दर्ज है, लेकिन दो माह बाद उनमें से भी किसी का कुछ अतापता नहीं है।
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नेपालियों के साथ आई नजर
आपदा के वक्त कई नाबालिग बच्चों को नेपाली और बाहरी राज्यों के कुछ लोगों के साथ देखा गया था। उनमें से करीब पांच को तो ऋषिकेश से पुलिस ने एनजीओ की मदद से बरामद कर लिया था।


इस तरह की शिकायतें आने के बाद राज्य भर के बार्डर एरिया में सघन चेकिंग अभियान भी चलाने के निर्देश आईजी लॉ एंड आर्डर की ओर से दिए गए थे।

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल सक्रिय
दोनों मंडलों में स्थित चार एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को सक्रिय कर दिया गया था। कई एनजीओ भी ह्यूमन ट्रैफिकिंग का पता लगाने में जुटे हैं। ट्रैफिकिंग कर बच्चों को बड़ी संख्या में नेपाल ले जाने की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली थीं।

मुख्यालय की ओर से पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर और चंपावत को सबसे ज्यादा संवेदनशील बताकर इस बाबत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

नेपालियों से रिकवर
ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर काम करने वाले एनजीओ एंपावर पीपुल के उत्तराखंड चैप्टर के सीईओ ज्ञानेंद्र कुमार के अनुसार इस तरह की काफी शिकायतें मिली हैं।

कुछ बच्चे नेपालियों से ऋषिकेश में रिकवर भी किए गए थे। हमारी भी करीब आठ टीमें इसका पता लगाने में लगी हैं।

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