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इस बरसात कहीं बिखर न जाए घरौंदा
रुद्रप्रयाग/लखपत रावत
Updated Tue, 09 Jul 2013 04:08 PM IST
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कभी जिस मंदाकिनी नदी के किनारे बसने का लोगों को सुकून था आज उसी मंदाकिनी का वेग लोगों में खौफ पैदा कर रहा है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में मंदाकिनी के उफान ने आम लोगों के माथे पर बल डाल दिए हैं।
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नदी किनारे कभी अपने घरौंदों में सुकून का जीवन यापन करने वाले लोग इन दिनो दर-दर भटकने को विवश हैं। इसे मंदाकिनी के वेग से पैदा हुई दहशत कहें या फिर बेबसी कि रुद्रप्रयाग, सुमाड़ी, अगस्त्यमुनि, चंद्रापुरी, तिलवाड़ा समेत कई छोटे-बड़े कस्बों में आज खामोशी छाई हुई है।
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यात्रा के दौरान गुलजार रहने वाले इन कस्बे के लोगों को अपने सपनों के आशियानों को छोड़कर मजबूरी में नाते रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने के लिए विवश होना पड़ा है। अभी सभी की निगाहें मंदाकिनी के स्वभाव पर टिकी हुई है, सबके मन में यही डर है कि कहीं मंदाकिनी में उठा सैलाब उनके उनके आशियानों को भी ना बहा ले जाए।
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हल्की बारिश में ही बढ़ रहा जलस्तर
हल्की सी बारिश होते ही मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ जा रहा है। मंदाकिनी के इस उग्र स्वभाव को देखकर जिलेवासी दहशत में जीने को बेबस हैं। मंदाकिनी नदी के उफान से जिले में दर्जनों आवासीय भवन ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि कई घर अभी भी खतरे की जद में बने हुए है।
आपदा प्रभावित दीपक बेंजवाल जनपद में बीते दिनों से हो रही बारिश से परेशान हैं। वह कहतें हैं कि मंदाकिनी किनारे बसे लोग रातभर जागकर नदी की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
लोगों को सता रहा घर डूबने का खौफ
लोगों को डर सता रहा है कि वर्षों की जमा पूंजी से बनाया घरौंदा कहीं तबाह न हो जाए। मंदाकिनी अभी भी अपने पूरे वेग में आगे बह रही है, जिससे अलकनंदा के जलस्तर में भी वृद्घि हुई है।
मंदाकिनी का जलस्तर तो बारिश रुकने के बाद थोड़ा कम भी हो जाएगा, लेकिन मंदाकिनी में अपने घरों को खो चुके लोगों को उबरने में शायद अभी लंगा वक्त लगे।