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रास्तों को ढूंढ सवा चार हजार गांवों को मिलेगी राह
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 13 Mar 2016 05:07 PM IST
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सड़क
- फोटो : file photo
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आपदा के बाद जिन गांवों के रास्ते गायब हुए हैं उन्हें मुख्य मार्ग से जुड़ने का फिर मौका मिलेगा। कांग्रेस सरकार के पांचवें बजट में गांवों की कनेक्टिविटी के लिए खासा ध्यान दिया गया है।
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इसके साथ ही नालों से टूटी सड़कों को जोड़ने के लिए पुल भी बनाए जाएंगे। बजट में ‘मेरा गांव-मेरी सड़क’ योजना के लिए प्रावधान किया गया है। अभी भी प्रदेश के सवा चार हजार गांवों को रास्तों की तलाश है।
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पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए सबसे बड़ी बाधा रोड कनेक्टिविटी का अभाव है। बड़ी संख्या में ऐसे गांव हैं जिनके संपर्क मार्ग नहीं है। मोटर मार्गों तक आने के लिए लोगों को लंबा और दुर्गम रास्ता तय करना पड़ता है।
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बजट में छोटे और बड़े पुलों को बनाने का भी प्रावधान:
पहुंच मार्गों के निर्माण के साथ सरकार ने बजट में छोटे और बड़े पुलों को बनाने के लिए प्रावधान किए हैं। इसके साथ ही राजधानी के तीन फ्लाईओवर समेत प्रतापनगर टिहरी के डोबरा-चांठी पुल को भी बजट में शामिल कर लिया है।
वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने बजट में सड़कों और पुल के लिए 2392.07 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया है। लोक निर्माण विभाग कान्ट्रेक्टर मैनेजमेंट सिस्टम, डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम और रोड एक्सीडेंटल पोर्टल का विकास कर रहा है।
बजट में बताया गया कि विभिन्न श्रेणियों के 15638 गांवों में से 11384 गांवों को सड़क यातायात सुविधा से जोड़ा जा चुका है। 4254 गांवों को जोड़ा जा रहा है।