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उत्तरकाशी: 71 साल से जंगल के कानूनों में कैद 42 गांव के लोग, गोविंद वन्यजीव विहार के सख्त नियम बने बाधा

Mon, 02 Nov 2026 02:36 PM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Mon, 02 Nov 2026 02:36 PM IST
सार

सड़क, संचार और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे ग्रामीणों की मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन कानूनों के चलते रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हक-हकूक हासिल करना भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है।

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Uttarkashi news 42 villages await development for 71 years due to strict govind wildlife sanctuary laws
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मोरी विकासखंड के सूदूरवर्ती पांच पट्टियों के 42 गांव के लोग पिछले 71 वर्षों से गोंविद वन्य जीव विहार के सख्त वन कानूनों के कारण अपने हक-हकूकों का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी उन्हें फ्री ग्रांट और पीडी की लकड़ियों सहित विकास कार्यों के लिए परेशान होना पड़ा है। वन्य जीव अधिनियम के तहत वहां पर अभी तक जल जीवन मिशन सहित संचार और सड़क आदि सुविधाओं के लिए भूमि हस्तांतरित नहीं हो पा रही है।

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वर्ष 1955 में मोरी विकासखंड के बड़ासू सहित पंचगाई, अढोड़, फते पर्वत सहित सिंगतूर पट्टी के तहत 957.96 हेक्टेयर भूमि को इसमें शामिल किए गए थे। तब से 71 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को अपने हक-हकूकों के लिए परेशान होना पड़ता है। स्थानीय निवासी जगदीश रांगड़, राजपाल रावत का कहना है कि आज भी वह भवन सहित अन्य प्रयोग के लिए फ्री ग्रांट की लकड़ी नहीं मिल पाती है। साथ सख्त कड़े वन कानून आज भी जनपद के सबसे सूदूरवर्ती क्षेत्र के लोगों के विकास में बाधा बन रहे हैं।

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वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। लेकिन उसके बाद भी लोगों को किसी प्रकार की राहत नहीं मिल पाई। कहा कि कई बार शासन-प्रशासन से इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर लोगों के हक-हकूक दिलवाने की मांग रखी गई। लेकिन वह आज भी पूरी नहीं हो पाई है।
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स्थिति यह है कि आज भी कई जल जीवन मिशन की योजनाएं पूर्ण नहीं हो पाई हैं। साथ ही सड़कों सहित पुलों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। राजपाल रावत ने बताया कि इन क्षेत्रों में संचार सुविधाएं दुरूस्त करने के लिए अभी तक बीएसएनएल को केबिल बिछाने की अनुमति नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार कर केंद्र सरकार से पत्राचार करना चाहिए।

 

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ग्रामीणों के हक-हकूकों के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया

गोविंद वन्य जीव विहार की उपनिदेशक निधि सेमवाल का कहना है कि ग्रामीणों के हक-हकूकों के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। वहां से लोगों की सुविधा के लिए टौंस वन प्रभाग से यह सुविधा देने की बात कही गई है। उसके बाद भी एक दूसरा प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है कि ग्रामीणों उनके हक-हकूक उनके क्षेत्र से ही मिले।

 

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