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स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए तय करते मीलों सफर

Tue, 25 Jan 2022 10:45 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 10:45 PM IST
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Traveling miles for health, education
सीमांत जनपद के बीस से अधिक गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीण कई किमी पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं। मोरी विकासखंड के ओसला सहित चार गांवों के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा के लिए 35 किमी का पैदल सफर तय करते हैं। चुनाव में जनप्रतिनिधि गांव तक सड़क और अन्य सुविधाएं पहुंचाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई सुध नहीं लेता।
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छह विकासखंड वाले जनपद में अधिकांश विकास खंडों में ऐसा कोई गांव नहीं है। जहां ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबी दूरी न नापनी पड़ती हो। भटवाड़ी विकासखंड के पिलंग और जौड़ाव के ग्रामीणों को 15 से 18 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। नौगांव ब्लाक के थली व भौंती गांव सड़क से करीब छह किमी की दूरी पर है। थली गांव से ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए दस और भौंती गांव से 20 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। थली गांव से जूनियर हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई के लिए दस किमी दूर नौगांव तो भौंती से से भी दस किमी दूर बर्निगाड़ जाना पड़ता है। इसी क्षेत्र के दुर्बिल, कोठार, नकोडा, कफोला, बसराली व अनुसूचित जाति बाहुल्य ढालीगांव सड़क से लगभग पांच किमी दूर हैं। उधर, मोरी ब्लाक के ओसला, गंगाड़, पवाणी, ढाडमीटर गांव के लोग 20 किमी दूर तालुका पहुंचते हैं। वहां भी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में कोई उपचार न मिलने के कारण वहां से 35 किमी दूर सड़क मार्ग से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी में पहुंचते हैं। यही हाल सेवा बरी, खन्यासणी गांव का है। जहां ग्रामीणों को 10 से 13 किमी पैदल चलकर धौला जाना पड़ता है। फिर वहां से 25 किमी दूरी तय कर मोरी पहुंचते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति लिवाड़ी, फिताड़ी, रेक्चा, कासला व हरिपुर गांव का है।
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- ग्रामीण आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। 35 किमी का पैदल सफर तय कर पीएचसी मोरी तक पहुंचते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव अक्सर ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ जाता है। जनप्रतिनिधि कभी इस ओर ध्यान नहीं देते। -वरदान सिंह, पूर्व प्रधान ओसला।
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