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चिन्यालीसौड़ बाजार में अब नहीं होगा भू-धंसाव, शुरु हुए सुरक्षात्मक कार्य

Fri, 24 Jun 2022 10:09 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 10:09 PM IST
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There will no longer be land subsidence in Chinyalisaur market, protective work started
टिहरी बांध की झील से कटाव के कारण अब चिन्यालीसौड़ बाजार में भू-धंसाव की समस्या नहीं होगी। समस्या के समाधान के लिए टीएचडीसी ने पौने पांच करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य शुरू कर दिए हैं। इन कार्यों को एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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वर्ष 2006 में टिहरी बांध की झील बनने से चिन्यालीसौड़ बाजार और आसपास के इलाके में कटाव शुरू हुआ, जिससे चिन्यालीसौड़ बाजार भी खतरे की जद में आ गया था। स्थानीय लोग लगातार टीएचडीसी से सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे थे, जिसके बाद यहां वायरक्रेट (पत्थरों के साथ तारों का जाल लगाते हैं) लगाए गए थे, लेकिन वायरक्रेट के बाद भी खतरा बना हुआ था। इसके बाद अब जाकर टीएचडीसी ने चिन्यालीसौड़ बाजार से अस्पताल रोड तक 280 मीटर लंबे और 16 मीटर ऊंचाई में पौने पांच करोड़ रुपये की लागत से रॉक बोल्ट एंकर, एसडीए ट्रीटमेंट कार्य के साथ वायरमैसिंग का काम शुरू कर दिया है। व्यापार मंडल अध्यक्ष कृष्णा नौटियाल और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शूरवीर रांगड़ ने बताया कि लंबे समय से टीएचडीसी से चिन्यालीसौड़ बाजार और कॉपरेटिव बैंक और अस्पताल रोड पर कटाव हो रहा था। टीएचडीसी की ओर से सुरक्षात्मक कार्य किए जाने से भू-धंसाव का खतरा कम हो जाएगा। संवाद
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क्या होता है, रॉक बोल्ट एंकर एसडीए ट्रीटमेंट
यह तकनीक भू-धंसाव व भूस्खलन वाले क्षेत्रों में प्रयोग की जाती है। इस तकनीक में प्रभावित क्षेत्र में तारों का जाल (वायरमैस) लगाया जाता है। जाल के बीच कई स्थानों पर पहाड़ी पर छेद कर लोहे की रॉड एक से पांच मीटर तक अंदर डाली जाती है। पहाड़ी के अंदर रॉड का हिस्सा फिक्स हो जाता है। बाद में रॉड व जाल के बाहर सीमेंट का स्प्रे किया जाता है। तारों के जाल को वायरमैस कहा जाता है। पहाड़ी पर सेल्फ ड्रिलिंग एंकर (एसडीए) विधि से ड्रिल की जाती है। रॉड्स की लंबाई भू-धंसाव व भूस्खलन की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि स्थान अधिक संवेदनशील है तो रॉड्स की लंबाई पांच मीटर तक रखी जाती है। इस विधि से पहाड़ी या चट्टानों पर दरारें भर जाती हैं, जिससे भू-धंसाव या भूस्खलन नियंत्रित हो जाता है।
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प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षात्मक कार्य शुरू कर दिए गए हैं। इन कार्यों के बाद चट्टान खिसकने और पत्थर गिरने का खतरा नहीं रहेगा। - अतुल बहुगुणा, साइट इंचार्ज, टीएचडीसी।

टीएचडीसी के एजीएम ने किया निरीक्षण
चिन्यालीसौड़ बाजार में शुरू हुए सुरक्षात्मक कार्य का टीएचडीसी के एजीएम दिनेश शुक्ला ने निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रीटमेंट कार्य कर रही कार्यदायी एजेंसी को सुरक्षात्मक कार्य में गुणवत्ता बनाए रखने के साथ समय पर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
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