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खुले आसमान के नीचे बैठने को छात्र मजबूर
ब्यूरो/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Thu, 29 Dec 2016 09:39 PM IST
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क्षेत्र के राइंका बर्नीगाड़ का भवन नहीं बनने से छात्रों को खुले आसमान के नीचे प्री-बोर्ड परीक्षा देने को मजबूर हैं। स्थिति यह है निर्माणाधीन स्कूल भवन में निर्माणदायी संस्था की ओर से छात्रों के लिए शौचालय ही नहीं बनाया गया है।
राइंका बर्नीगाड़ में ढाई करोड़ की लागत से भवन का निर्माण पेयजल निर्माण निगम टिहरी कर रहा है, जिसकी गुणवत्ता ठीक नहीं होने पर लोगों ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग की है।
निर्माणाधीन भवन का कार्य अब समाप्त होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि जिस भवन को बनाने के लिए सरकार ने ढाई करोड़ दिए उस भवन में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। विद्यालय स्टाफ के लिए तो शौचालय बनाया गया, लेकिन छात्रों के लिए नहीं है।
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राइंका बर्नीगाड़ में क्षेत्र के 450 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय में इन दिनों प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छात्र-छात्राओं को बिना टाटपट्टी के ही नीचे जमीन पर बैठना पड़ रहा है।
शिक्षक अभिभावक एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह का आरोप है कि भवन निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को विद्यालय के मैदान में डाला गया है, जिससे छात्राएं धूल में पढ़ने को मजबूर हैं।
प्रभारी प्रधानाचार्य चेतन देव नौटियाल का कहना है कि विद्यालय मैदान में पड़ी मिट्टी को हटाने और छात्राओं के लिए शौचालय बनाने के लिए कई बार कार्यदाई संस्था के साथ पत्राचार किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अनुबंध के हिसाब से भवन निर्माण का कार्य किया गया है। पहली मंजिल में तीन शौचालय बनाए गए हैं। दूसरी में स्टाफ के मना करने पर शौचालय तक नहीं बनाए गए। उनकी जगह पर पुराने शौचालयों को ठीक किया जाएगा। साथ ही पुश्ता ढहने से मैदान में पड़ी मिट्टी को हटाया जाएगा।--अमर ज्योति डोबरियाल, परियोजना प्रबंधक।
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राइंका बर्नीगाड़ में ढाई करोड़ की लागत से भवन का निर्माण पेयजल निर्माण निगम टिहरी कर रहा है, जिसकी गुणवत्ता ठीक नहीं होने पर लोगों ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग की है।
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निर्माणाधीन भवन का कार्य अब समाप्त होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि जिस भवन को बनाने के लिए सरकार ने ढाई करोड़ दिए उस भवन में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। विद्यालय स्टाफ के लिए तो शौचालय बनाया गया, लेकिन छात्रों के लिए नहीं है।
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राइंका बर्नीगाड़ में क्षेत्र के 450 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यालय में इन दिनों प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छात्र-छात्राओं को बिना टाटपट्टी के ही नीचे जमीन पर बैठना पड़ रहा है।
शिक्षक अभिभावक एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह का आरोप है कि भवन निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को विद्यालय के मैदान में डाला गया है, जिससे छात्राएं धूल में पढ़ने को मजबूर हैं।
प्रभारी प्रधानाचार्य चेतन देव नौटियाल का कहना है कि विद्यालय मैदान में पड़ी मिट्टी को हटाने और छात्राओं के लिए शौचालय बनाने के लिए कई बार कार्यदाई संस्था के साथ पत्राचार किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अनुबंध के हिसाब से भवन निर्माण का कार्य किया गया है। पहली मंजिल में तीन शौचालय बनाए गए हैं। दूसरी में स्टाफ के मना करने पर शौचालय तक नहीं बनाए गए। उनकी जगह पर पुराने शौचालयों को ठीक किया जाएगा। साथ ही पुश्ता ढहने से मैदान में पड़ी मिट्टी को हटाया जाएगा।--अमर ज्योति डोबरियाल, परियोजना प्रबंधक।