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डोली स्नान के साथ माघ मेला शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 14 Jan 2017 09:27 PM IST
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Ganga Aarti
- फोटो : amarujala
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कंडार देवता की डोली व हरि महाराज के ढोल के सानिध्य में स्वामी चिदानंद मुनि व अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह की मौजूदगी में बाड़ाहाट कू थौलू (माघ मेला) शुरू हुआ। इस दौरान मकर संक्रांति पर्व पर देव डोलियों ने गंगा स्नान करने के साथ ही नृत्य किया। मेले में इस बार पहली बार परमार्थ निकेतन की तर्ज पर शंकर मठ घाट में गंगा आरती का आयोजन किया गया।
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शनिवार को आजाद मैदान पर सात दिनों तक चलने वाले माघ मेले के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद मुनि ने कहा कि गंगा आरती से उत्तरकाशी पूरे विश्व में छा जाएगा। गंगा आरती यहां ध्यान-साधना का केंद्र बनेगी, जिससे देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का यहां सैलाब उमड़ेगा।
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कहा ऋषिकेश परमार्थ निकेतन में सर्दियों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। उन्होंने कहा कि यहां का मंडवा व झंगोरा एक दिन दुनिया को अपनी ओर खींचेगा। अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने कहा कि मेले पहाड़ों की संस्कृति की धरोहर है। मेले के शुभारंभ पर गोस्वामी गणेशदत्त विद्या मंदिर की छात्राओं और श्री विश्वनाथ संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुति दी।
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इस मौके पर जिलाधिकारी डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, सीडीओ उदय सिंह राणा, एसपी ददन पाल, एडीएम पीएल शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट व एसडीएम भटवाड़ी नितिका खंडेलवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा आदि उपस्थित रहे।
गंगा-यमुना की संस्कृति का दिखा अनूठा संगम
माघ मेले (बड़ाहाटा कु थौलू) में पहले दिन गंगा-यमुना घाटी की संस्कृति के रंग बिखरे। नगर क्षेत्र में गंगा मां के कलश और यमुना की छड़ी की अगुवाई में निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। देव डोली एवं निशानों का मिलन व नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। विश्वनाथ मंदिर से शुरू हुई यात्रा मेला मंच पर संपन्न हुई। इसके बाद मेला मंच पर गंगा और यमुना घाटी की संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई दिया।
देव डोलियों ने किया स्नान
मकर संक्रांति व माघ मेले के मौके पर जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंची देवी डोली और निशानों ने मणिकर्णिका, केदार औश्र जड़भरत घाटों पर स्नान किया। घाटों सहित नगर के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। सुबह 4 बजे से ही गंगा घाटों पर स्नान के लिए लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। वहीं मकर संक्रांति पर्व पर विश्वनाथ मंदिर सहित विभिन्न पौराणिक मंदिरों में जल चढ़ाने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।