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गर्मी शुरू होते ही गहराने लगा पेयजल संकट
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 02 Apr 2016 10:01 PM IST
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इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने का असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ने लगा है। स्रोतों पर पानी कम होने से पेयजल संकट गहराने लगा है। जिला मुख्यालय एवं आसपास के क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए बनाई जा रही पंपिंग पेयजल योजनाएं आधी-अधूरी पड़ी हैं। समय रहते यदि पेयजल के इंतजाम नहीं किए गए, तो यात्रा सीजन में यहां पानी के लिए हाहाकार वाली स्थिति पैदा हो सकती है।
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गर्मियों की शुरूआत में ही जिले के विभिन्न हिस्सों में पेयजल की किल्लत होने लगी है। स्रोत पर वाटर डिस्चार्ज कम होने के कारण टैंकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में फिलहाल जल संस्थान सुबह और शाम को कुछ घंटे जलापूर्ति कर रहा है।
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बीते सालों में असी गंगा पर बनी पेयजल योजनाएं बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होने पर जल संस्थान ने जिला मुख्यालय और आसपास के घनी आबादी क्षेत्र के लिए करीब दस करोड़ लागत से चार पंपिंग योजनाओं का निर्माण तो कराया, लेकिन अभी तक इनके टैंक नहीं बन पाए हैं।
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ऐसे में लेकिन गर्मी बढ़ने और यात्रा सीजन में फ्लोटिंग पॉपुलेशन बढ़ने पर पेयजल संकट गहराने के आसार हैं। ग्रामीण इलाकों में भी कमोबेश यही स्थिति है। बीते दिनों में मनेरा, किरूण धनारी, गंगोरी क्षेत्र के ग्रामीण पानी के लिए जल संस्थान के दफ्तर पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। जोशियाड़ा लदाड़ी क्षेत्र में भी पानी की किल्लत लोगों को परेशान कर रही है।
कुछ गांवों में पानी की दिक्कत दूर करने के लिए डीएम से बजट की मांग की गई है। जिला मुख्यालय क्षेत्र के लिए बनी पंपिंग योजनाओं के टैंक भी जून तक तैयार कर लिए जाएंगे। टैंक बनने तक पंपिंग योजना का पानी सीधे लाइन में जोड़कर जलापूर्ति की जाएगी।
विरेंद्र वर्मा, ईई जल संस्थान उत्तरकाशी।