{"_id":"6235c893f0b5cb353b76c587","slug":"sdrf-s-diver-unit-is-not-in-uttarkashi-utter-kashi-news-drn406721045","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तरकाशी में नहीं है एसडीआरएफ की गोताखोर यूनिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तरकाशी में नहीं है एसडीआरएफ की गोताखोर यूनिट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद मुख्यालय में एसडीआरएफ की गोताखोर यूनिट तैनात किए जाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजा गया है। यहां अक्सर भागीरथी सहित अन्य नदियों में वाहनों के डूबने की घटनाओं पर गोताखोरों को टिहरी या ऋषिकेश से बुलाना पड़ता है, जिन्हें घटना स्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है। जिससे रेस्क्यू अभियान प्रभावित होता है।
जनपद में भागीरथी, यमुना, टोंस, इंद्रावती, असीगंगा, रुपिन व सुपिन कई अन्य नदियों व टिहरी झील के चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में लोगों के डूबने व सड़क दुर्घटनाओं के दौरान वाहनों में सवार लोगों सहित वाहनों के डूबने की घटनाएं होती है। जनपद में आपदा व अन्य दुर्घटनाओं के दौरान रेस्क्यू अभियान के लिए एसडीआरएफ तो तैनात है, लेकिन गोताखोर टीम न होने के कारण रेस्क्यू अभियान में दिक्कत आती है। अधिक गहराई में वाहनों व लोगों के डूबने पर टिहरी और ऋषिकेश से एसडीआरएफ के गोताखोर बुलाने पड़ते हैं, जिससे कई बार रेस्क्यू अभियान में विलंब हो जाता है। इस दौरान प्रशासन व एसडीआरएफ को स्थानीय जनता व पीड़ितों के परिजनों का विरोध भी झेलना पड़ता है। वहीं यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में यहां पर्यटक व तीर्थयात्री पहुंचते हैं। यात्रा मार्गों पर अत्यधिक वाहनों की आवाजाही रहती है। इस दौरान भी सड़क दुुर्घटना की स्थिति में गोताखारों की कमी प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बनती है। इस सब को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुलिस उपमहानिरीक्षक एसडीआरएफ को प्रस्ताव भेज मुख्यालय में एसडीआरएफ की गोताखोर टीम (डीप डाइविंग) अत्याधुनिक उपकरणों सहित तैनात किए जाने की मांग की है।
-जनपद में खोज बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ के गोताखोर टीम तैनात किए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे डूबे व्यक्तियों के लिए तत्काल खोज बचाव कार्य शुरू किया जा सके। मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जनपद में भागीरथी, यमुना, टोंस, इंद्रावती, असीगंगा, रुपिन व सुपिन कई अन्य नदियों व टिहरी झील के चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में लोगों के डूबने व सड़क दुर्घटनाओं के दौरान वाहनों में सवार लोगों सहित वाहनों के डूबने की घटनाएं होती है। जनपद में आपदा व अन्य दुर्घटनाओं के दौरान रेस्क्यू अभियान के लिए एसडीआरएफ तो तैनात है, लेकिन गोताखोर टीम न होने के कारण रेस्क्यू अभियान में दिक्कत आती है। अधिक गहराई में वाहनों व लोगों के डूबने पर टिहरी और ऋषिकेश से एसडीआरएफ के गोताखोर बुलाने पड़ते हैं, जिससे कई बार रेस्क्यू अभियान में विलंब हो जाता है। इस दौरान प्रशासन व एसडीआरएफ को स्थानीय जनता व पीड़ितों के परिजनों का विरोध भी झेलना पड़ता है। वहीं यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में यहां पर्यटक व तीर्थयात्री पहुंचते हैं। यात्रा मार्गों पर अत्यधिक वाहनों की आवाजाही रहती है। इस दौरान भी सड़क दुुर्घटना की स्थिति में गोताखारों की कमी प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बनती है। इस सब को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुलिस उपमहानिरीक्षक एसडीआरएफ को प्रस्ताव भेज मुख्यालय में एसडीआरएफ की गोताखोर टीम (डीप डाइविंग) अत्याधुनिक उपकरणों सहित तैनात किए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
-जनपद में खोज बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ के गोताखोर टीम तैनात किए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे डूबे व्यक्तियों के लिए तत्काल खोज बचाव कार्य शुरू किया जा सके। मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी।
विज्ञापन