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Uttarkashi News: आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले सैनिटरी पैड की गुणवत्ता खराब
Wed, 23 Sep 2026 05:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 23 Sep 2026 05:43 PM IST
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खरीद नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वहन करना पड़ रहा है खर्चा
गर्भवतियों के आहार के भाड़े का पैसा भी नहीं मिल रहा
उत्तरकाशी। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किशोरियों के लिए दिए जा रहे सैनिटरी पैड की गुणवत्ता सही न होने के कारण उनको नगर व ग्रामीण क्षेत्र में कोई नहीं खरीद रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि खरीद नहीं होने के कारण उनको ही उसका पूरा खर्चा वहन करना पड़ रहा है। इससे वह केंद्रों में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। साथ ही गर्भवतियों के जाने वाल आहार के भाड़े का पैसा भी उन्हें ही देना पड़ रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिन सैनिटरी पैड को किशोरियों और महिलाओं के प्रयोग के लिए दिया जा रहा है। उसकी गुणवत्ता खराब होने के कारण उसका किसी प्रकार का प्रयोग नहीं हो रहा है। आंगनबाड़ी संगठन की जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी नौटियाल, रुकमणी सेमवाल, सुमित्रा, किरन भंडारी, चंदा पंवार, वंदना देवी का कहना है कि पहले सरकार की ओर से वह पांच रूपए की लागत से बेचने के लिए दिए गए। उस दौरान वह कुछ महिलाओं ने खरीदे लेकिन अब उसका मूल्य 15 रुपये होने के बाद से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें कोई भी नहीं खरीद रहा है।
इसलिए उसका पूरा खर्चा उन्हें ही वहन करना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में प्रत्येक केंद्रों के लिए आए पहल लॉट का खर्चा उन्हें स्वयं उठाना पड़ा था। वहीं अब दूसरे लॉट का लेने से उनकी ओर से इन्कार किया गया है। कहा कि इसके साथ ही केंद्रों में आने वाले पौष्टिक आहार का भाड़ा भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। इस संबंध में उन्होंने काबीना मंत्री रेखा आर्य को भी ज्ञापन भी दिया। दूसरी ओर इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को फोन करने पर उनकी ओर से फोन नहीं उठाया गया।
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गर्भवतियों के आहार के भाड़े का पैसा भी नहीं मिल रहा
उत्तरकाशी। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किशोरियों के लिए दिए जा रहे सैनिटरी पैड की गुणवत्ता सही न होने के कारण उनको नगर व ग्रामीण क्षेत्र में कोई नहीं खरीद रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि खरीद नहीं होने के कारण उनको ही उसका पूरा खर्चा वहन करना पड़ रहा है। इससे वह केंद्रों में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। साथ ही गर्भवतियों के जाने वाल आहार के भाड़े का पैसा भी उन्हें ही देना पड़ रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिन सैनिटरी पैड को किशोरियों और महिलाओं के प्रयोग के लिए दिया जा रहा है। उसकी गुणवत्ता खराब होने के कारण उसका किसी प्रकार का प्रयोग नहीं हो रहा है। आंगनबाड़ी संगठन की जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी नौटियाल, रुकमणी सेमवाल, सुमित्रा, किरन भंडारी, चंदा पंवार, वंदना देवी का कहना है कि पहले सरकार की ओर से वह पांच रूपए की लागत से बेचने के लिए दिए गए। उस दौरान वह कुछ महिलाओं ने खरीदे लेकिन अब उसका मूल्य 15 रुपये होने के बाद से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें कोई भी नहीं खरीद रहा है।
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इसलिए उसका पूरा खर्चा उन्हें ही वहन करना पड़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में प्रत्येक केंद्रों के लिए आए पहल लॉट का खर्चा उन्हें स्वयं उठाना पड़ा था। वहीं अब दूसरे लॉट का लेने से उनकी ओर से इन्कार किया गया है। कहा कि इसके साथ ही केंद्रों में आने वाले पौष्टिक आहार का भाड़ा भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है। इस संबंध में उन्होंने काबीना मंत्री रेखा आर्य को भी ज्ञापन भी दिया। दूसरी ओर इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को फोन करने पर उनकी ओर से फोन नहीं उठाया गया।
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