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चार दशक पहले खुला नारी निकेतन हुआ बंद
ब्यूरो/ अमर उजाला, नौगांव (उत्तरकाशी)
Updated Thu, 02 Mar 2017 10:38 PM IST
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चार दशक पहले नौगांव में स्थापित जिले का राजकीय नारी निकेतन केंद्र महिला कल्याण के सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। निराश्रित महिलाओं के लिए वर्ष 1978 में नौगांव में खोला गया नारी निकेतन अब बंद हो चुका है। स्थापना के दौर से ही एक प्राइवेट भवन में चल रहे नारी निकेतन केंद्र पर पिछले छह माह से ताला लटका है।
राज्य बनने के बाद से ही नारी निकेतन केंद्र पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए थे। स्थिति यह है कि बजट के अभाव में केंद्र पूरी तरह से बंद हो चुका है। विभाग ने भी अप्रैल में यहां से अपने सामान समेटने की तैयारी कर ली। यहां तैनात एक क्लर्क व रसोइया सालों से जिला प्रोबेशन कार्यालय में अटैच है, जिनका वेतन इसी केंद्र के नाम से आहरित हो रहा है। जबकि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छह माह पहले संप्रेक्षण गृह डुंडा में संबद्ध किया गया है।
पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख शशि मोहन राणा, भाजपा के मंडल अध्यक्ष बलदेव चौहान आदि का कहना है कि समाज कल्याण विभाग को केंद्र के संचालन के लिए शासन से बजट की मांग करनी चाहिए।
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इधर, समाज कल्याण अधिकारी जीत सिंह रावत का कहना है कि संवासिनियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नारी निकेतन केंद्र खोला गया था। अब समाज में इस प्रकार के प्रकरण नहीं है।
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राज्य बनने के बाद से ही नारी निकेतन केंद्र पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए थे। स्थिति यह है कि बजट के अभाव में केंद्र पूरी तरह से बंद हो चुका है। विभाग ने भी अप्रैल में यहां से अपने सामान समेटने की तैयारी कर ली। यहां तैनात एक क्लर्क व रसोइया सालों से जिला प्रोबेशन कार्यालय में अटैच है, जिनका वेतन इसी केंद्र के नाम से आहरित हो रहा है। जबकि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छह माह पहले संप्रेक्षण गृह डुंडा में संबद्ध किया गया है।
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पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख शशि मोहन राणा, भाजपा के मंडल अध्यक्ष बलदेव चौहान आदि का कहना है कि समाज कल्याण विभाग को केंद्र के संचालन के लिए शासन से बजट की मांग करनी चाहिए।
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इधर, समाज कल्याण अधिकारी जीत सिंह रावत का कहना है कि संवासिनियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नारी निकेतन केंद्र खोला गया था। अब समाज में इस प्रकार के प्रकरण नहीं है।