{"_id":"5730964e4f1c1b4c12919967","slug":"national-mother-declare-the-cow","type":"story","status":"publish","title_hn":"गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने को भरी हुंकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने को भरी हुंकार
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Mon, 09 May 2016 07:23 PM IST
विज्ञापन
गाय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाय को राष्ट्र माता के पद पर सुशोभित करने की मांग को लेकर भारतीय गो क्रांति मंच ने चरणबद्ध आंदोलन के लिए हुंकार भर दी। सोमवार को आंदोलन का आगाज उत्तरकाशी से संत गोपालमणि के नेतृत्व में शुरू हुआ। मांग के समर्थन में गो भक्तों ने यहां जुलूस-प्रदर्शन कर डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे। कहा गो माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलने के बाद ही वे चैन से बैठेंगे।
विज्ञापन
जिले भर से बड़ी संख्या में आए गो भक्त पुरी खेत में एकत्रित हुए। वहां संत गोपाल मणि ने गो की महिमा का वर्णन सुनाया। कहा जन्म से लेकर मृत्यु तक गो ही मनुष्य का पालनहार है। जिस तरह हम अपनी मां को घर से लेकर समाज में सम्मान देते है, उसी तरह भारतीय संस्कृति और समाज में गाय का स्थान सर्वोच्च है। बताया गया कि गाय को राष्ट्र माता पद पर सुशोभित करने के लिए पूरे देश में विधिवत आंदोलन शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
उत्तराखंड में यह अंादोलन 21 मई तक चलेगा। 10 मई को टिहरी, 11 को पौड़ी, 12 को रुद्रप्रयाग, 13 को चमोली, 14 को बागेश्वर, 15 को अल्मोड़ा, 16 को पिथौरागढ़, 17 को चंपावत, 18 को ऊधमसिह नगर, 19 को नैनीताल, 20 को हरिद्वार और 21 मई को देहरादून में प्रदर्शन होगा। पुरी खेत से जुलूस-प्रदर्शन करते हुए गो भक्त कलेक्ट्रेट पहुंचे।
विज्ञापन
वहां उन्होंने डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में गो माता के लिए गो मंत्रालय की स्थापना करने, गोवंश हत्यारों के लिए कठोर दंड देने, गो चरान भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई।
जुलूस-प्रदर्शन में मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर भट्ट शास्त्री, उपाध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, महिला प्रमुख जयेंद्री राणा, राजेंद्र सिंह रावत, भरत सिंह पयाल, बुद्धि सिंह भंडारी, रमेश रमोला, डा.राधेश्याम खंडूरी, समरवीर पंवार आदि शामिल थे।