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दो दिन के अंदर संशोधित प्रस्ताव उपलब्ध कराएं
उत्तरकाशी
Updated Fri, 20 Nov 2015 07:03 PM IST
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सीमांत जनपद उत्तरकाशी में बजट अवमुक्त होने के बाद भी विकास कार्य ठप पड़े हैं। ऐसा हुआ चालू वित्तीय वर्ष की जिला योजना विवादों में घिरने के कारण। पूर्व में स्वीकृत 36 करोड़ के विभिन्न प्रस्ताव निरस्त करने के बाद अब पुन: जिला नियोजन समिति के सदस्यों से प्रस्ताव मांगे तो गए हैं लेकिन अब भी विवादों के चलते इनकी जल्द स्वीकृति के आसार नहीं हैं। ऐसे में चार माह के भीतर 36 करोड़ के कार्य कैसे पूरे होंगे, लोग समझ नहीं पा रहे हैं। शुक्रवार को हुई बैठक में प्रभारी मंत्री ने नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा।
जिले में वर्ष 2015-16 के लिए 53 करोड़ उन्सठ लाख बीस हजार रुपये की जिला योजना अनुमोदित हुई। इसके सापेक्ष 49.50 करोड़ का बजट अवमुक्त भी हो चुका है, लेकिन योजनाओं के चयन एवं बजट आवंटन में अनियमितताओं के चलते पूर्व में स्वीकृत करीब 36 करोड़ के प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए थे। शुक्रवार को एक बार फिर जिले के प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह की अध्यक्षता में जिला नियोजन समिति की बैठक बुलाई गई। उन्होंने डीपीसी सदस्यों को दो दिन के अंदर नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही पूर्व में अनुमोदित योजनाओं की जांच के आदेश भी दिए। उन्होंने योजनाओं में परिवर्तन का अधिकार डीएम को दिया।
गड़बड़ी की जांच की मांग पर बहिष्कार किया
जिला पंचायत के डीपीसी सदस्यों ने पूर्व में अनुमोदित प्रस्तावों में हुई गड़बड़ी की जांच कर शीघ्र खुलासा करने की मांग करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक में मनोनीत डीपीसी सदस्यों के बजाय निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से ही जिला योजना में प्रस्ताव शामिल करने की मांग की गई। बैठक के बहिष्कार के चलते जिला योजना फिर विवादों में घिर गई है। अभी 36 करोड़ की योजनाओं के प्रस्ताव मिलने और इनके स्वीकृत होने में विलंब तय है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इस वित्तीय वर्ष के बचे हुए चार माह में कब ये प्रस्ताव स्वीकृत होंगे और कब इन पर काम होगा। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण, पुरोला विधायक मालचंद, पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा एवं अतोल रावत, डीएम विनय शंकर पांडेय, सीडीओ जीएस रावत, तथा अनीता गुसाईं, कुलदीप बिष्ट आदि तमाम डीपीसी सदस्य मौजूद रहे।
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जिले में वर्ष 2015-16 के लिए 53 करोड़ उन्सठ लाख बीस हजार रुपये की जिला योजना अनुमोदित हुई। इसके सापेक्ष 49.50 करोड़ का बजट अवमुक्त भी हो चुका है, लेकिन योजनाओं के चयन एवं बजट आवंटन में अनियमितताओं के चलते पूर्व में स्वीकृत करीब 36 करोड़ के प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए थे। शुक्रवार को एक बार फिर जिले के प्रभारी मंत्री प्रीतम सिंह की अध्यक्षता में जिला नियोजन समिति की बैठक बुलाई गई। उन्होंने डीपीसी सदस्यों को दो दिन के अंदर नए सिरे से संशोधित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही पूर्व में अनुमोदित योजनाओं की जांच के आदेश भी दिए। उन्होंने योजनाओं में परिवर्तन का अधिकार डीएम को दिया।
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गड़बड़ी की जांच की मांग पर बहिष्कार किया
जिला पंचायत के डीपीसी सदस्यों ने पूर्व में अनुमोदित प्रस्तावों में हुई गड़बड़ी की जांच कर शीघ्र खुलासा करने की मांग करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक में मनोनीत डीपीसी सदस्यों के बजाय निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से ही जिला योजना में प्रस्ताव शामिल करने की मांग की गई। बैठक के बहिष्कार के चलते जिला योजना फिर विवादों में घिर गई है। अभी 36 करोड़ की योजनाओं के प्रस्ताव मिलने और इनके स्वीकृत होने में विलंब तय है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इस वित्तीय वर्ष के बचे हुए चार माह में कब ये प्रस्ताव स्वीकृत होंगे और कब इन पर काम होगा। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण, पुरोला विधायक मालचंद, पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा एवं अतोल रावत, डीएम विनय शंकर पांडेय, सीडीओ जीएस रावत, तथा अनीता गुसाईं, कुलदीप बिष्ट आदि तमाम डीपीसी सदस्य मौजूद रहे।
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