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जमीन चिह्नित, फिर भी पुनर्वास नहीं

Sat, 19 Mar 2016 09:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी Updated Sat, 19 Mar 2016 09:51 PM IST
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Land marked, yet not rehabilitated
पुनर्वास - फोटो : amarujala

जमीन चिह्नित होने के बावजूद 2010 की आपदा प्रभावितों के पुनर्वास का मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। 27 आपदा प्रभावित परिवार गांव बाजार से तीन किमी दूर पाला मनेरी डैम कालोनी में शरण लिए हुए हैं। राहत के नाम पर 65 हजार रुपये की मामूली रकम मिली।

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वर्ष 2010 की आपदा में भटवाड़ी बाजार की 44 दुकानें और 39 घर आपदा की भेंट चढे़ थे। कई परिवार तो भटवाड़ी से पलायन कर गए। आपदा का सिलसिला 2012 तथा 2013 तक जारी रहा। राहत के नाम पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने 50 हजार गृह अनुदान तथा 15 हजार मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता तो दी, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा हुआ।
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अमृत सेमवाल ने तो आपदा तथा हाईवे पर यातायात बहाली के लिए सड़क चौड़ीकरण में अपना सात कमरे का मकान व तीन खेत गंवाये, लेकिन उन्हें मिला सिर्फ 65 हजार रुपये। अब वे कालोनी में शरण लेकर रह रहे हैं। यहां गाय पाल कर तीन किमी दूर भटवाड़ी गांव जा कर खेती करके परिवार का भरण पोषण करती है।
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अनुसूचित जाति बस्ती के हर्ष लाल अपने तीन भाईयों के साथ रोज मजदूरी की उम्मीद में कालोनी से बाजार आता है। पद्मा देवी का आपदा तथा हाईवे पर यातायात बहाली के लिए हुई कटिंग में दस नाली जमीन पर लगा बगीचा तथा मकान ध्वस्त हो गया, लेकिन उसे भी कुछ नहीं मिल पाया।

भटवाड़ी में ही 2012 के प्रभावितों को गृह अनुदान में दो लाख तथा 2013 के प्रभावितों को सात लाख मिल चुका है। सरकार को इस असमानता को खत्म करके उन्हें घर बना कर देना चाहिए।


प्रशासन ने पाला मनेरी कालोनी के पास ढामक में 10.75 हेक्टेयर जमीन पुनर्वास के लिए चिह्नित कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया है। भटवाड़ी के अलावा नौ और गांव जो अति संवेदनशील की श्रेणी में है, उनका घर-घर सर्वे व पुनर्वास के लिए वरियता क्रम निर्धारित करके एक बार फिर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।
-देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।

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