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Uttarkashi News: यमुनोत्री पैदल मार्ग पर रोटेशन से नहीं चल रहे हैं घोड़े-खच्चर
Sat, 17 May 2025 07:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 17 May 2025 07:30 PM IST
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संचालक हो रहे हैं परेशान, जिला पंचायत और ठेकेदार पर लगाया मनमानी का आरोप
बड़कोट। यमुनोत्री धाम की पैदल यात्रा पर घोड़ा-खच्चर संचालकों ने जिला पंचायत और ठेकेदार पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई घोड़ा-खच्चर संचालकों की मिलीभगत से एक दिन में दो से तीन बार नंबर आ रहा है। वहीं कई लोगों को एक-एक सप्ताह अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग कर रोटेशन व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की है।
घोड़ा संचालक अंकुश चौहान, किशन सिंह, पददु लाल, अंकित, सुनील कुमार, प्रमोद, मोहन लाल का कहना है कि कई घोड़ा-खच्चर संचालक रोटेशन में न चलकर ठेकेदार की मिलीभगत से मनमाने तरीके से चल रहे हैं। इसका कई बार विरोध भी किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई लोग पूर वर्ष बाद इस यात्रा के माध्यम से ही अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन उनका नंबर न आने के कारण उनकी आर्थिकी पर बुरा असर पड़ रहा है।
वहीं जब ठेकेदार और उसके कर्मचारियों से इस संबंध में बात करते हैं, तो वे अभद्रता करते हैं। यमुनोत्री पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन का जिम्मा जिला पंचायत ने एक ठेकेदार को दिया है। ढाई हजार से अधिक घोड़े-खच्चर इन दिनों धाम में संचालित हो रहे हैं। आरोप है 2700 घोड़े-खच्चर का जिला पंचायत ने पंजीकरण किया है और ठेकेदार ने पांच हजार से अधिक लोगों को टोकन दिए हैं।
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एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने कहा कि वैसे तो इसकी जिम्मेदारी जिला पंचायत की है, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो इसको देखते हुए कल तहसीलदार व सीओ को जानकीचट्टी जाएंगे।
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बड़कोट। यमुनोत्री धाम की पैदल यात्रा पर घोड़ा-खच्चर संचालकों ने जिला पंचायत और ठेकेदार पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई घोड़ा-खच्चर संचालकों की मिलीभगत से एक दिन में दो से तीन बार नंबर आ रहा है। वहीं कई लोगों को एक-एक सप्ताह अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग कर रोटेशन व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की है।
घोड़ा संचालक अंकुश चौहान, किशन सिंह, पददु लाल, अंकित, सुनील कुमार, प्रमोद, मोहन लाल का कहना है कि कई घोड़ा-खच्चर संचालक रोटेशन में न चलकर ठेकेदार की मिलीभगत से मनमाने तरीके से चल रहे हैं। इसका कई बार विरोध भी किया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई लोग पूर वर्ष बाद इस यात्रा के माध्यम से ही अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन उनका नंबर न आने के कारण उनकी आर्थिकी पर बुरा असर पड़ रहा है।
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वहीं जब ठेकेदार और उसके कर्मचारियों से इस संबंध में बात करते हैं, तो वे अभद्रता करते हैं। यमुनोत्री पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन का जिम्मा जिला पंचायत ने एक ठेकेदार को दिया है। ढाई हजार से अधिक घोड़े-खच्चर इन दिनों धाम में संचालित हो रहे हैं। आरोप है 2700 घोड़े-खच्चर का जिला पंचायत ने पंजीकरण किया है और ठेकेदार ने पांच हजार से अधिक लोगों को टोकन दिए हैं।
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एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने कहा कि वैसे तो इसकी जिम्मेदारी जिला पंचायत की है, लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो इसको देखते हुए कल तहसीलदार व सीओ को जानकीचट्टी जाएंगे।