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दशकों पहले नेलांग-जाढ़ूंग से बेदखल हुए ग्रामीणों में जगी गांव पुन: आबाद होने की उम्मीद

Sat, 26 Oct 2019 10:03 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2019 10:03 PM IST
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Hope to re-populate the villagers
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा नेलांग वैली के बाशिंदों के लिए होम स्टे योजना को प्रोत्साहित करने की घोषणा से आधी सदी पूर्व अपने गांव नेलांग एवं जाढ़ूंग से बेदखल हुए ग्रामीणों को पुन: अपने गांव आबाद होने की उम्मीद जगी है। भारत-चीमा से लगे क्षेत्र में यदि गांव आबाद हुए, तो क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत होने के साथ ही देश की सीमाओं की सुरक्षा और मजबूती मिलेगी।
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सरकार ने भारत-चीन युद्ध से पहले वर्ष 1960 में सीमावर्ती गांव नेलांग एवं जाढ़ूंग को खाली कराकर ग्रामीणों को बगोरी शिफ्ट कर दिया था। आधी सदी से ज्यादा समय बीतने के बाद भी इन दोनों गांवों के ग्रामीण मुआवजे के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत एप्पल फेस्टिवल में शामिल होने हर्षिल पहुंचे थे। इस दौरान नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव के जनजाति के समाज के पूर्व प्रधान एवं अन्य लोगों ने क्षेत्रीय विधायक गोपाल रावत एवं सीएम को ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया कि वे अपने गांव की जमीन के मुआवजे की आस में आधी सदी से ज्यादा समय गुजार चुके हैं। अब उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए। सरकार उन्हें उनका गांव और जमीनें लौटा दे। ग्रामीणों ने बताया कि नेलांग गांव में तो सेना एवं आईटीबीपी ने न तो उनके खेत छोड़े और गांव के घरों के पत्थर तक अब वहां नहीं हैं। जाढ़ूंग गांव में 2-3 खंडहर भर बचे हैं। दोनों गांवों की करीब 1350 नाली जमीन का सरकार ने अभी तक मुआवजा नहीं दिया है।
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मुख्यमंत्री ने गंगोत्री विधायक तथा जनजाति समुदाय की मांग पर शीत मरुस्थल वाले इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए होम स्टे योजना शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में सेना प्रमुख से पिछली बार दिए गए मांगपत्र पर बात कर चुके हैं। अब पुन: रक्षा मंत्रालय से बात कर उन्हें अपने गांव में बसने की कार्रवाई को आगे बढ़ाएंगे। सीमावर्ती क्षेत्र में स्थानीय लोगों को सेना का भरपूर सहयोग मिलता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बगोरी के पूर्व प्रधान भवान सिंह राणा, ग्राम प्रधान सरिता रावत, कमला देवी, जगत सिंह रावत, चरण सिंह, उर्मिला नेगी आदि ग्रामीणों ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा से ग्रामीणों को नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव पुन: आबाद होने की उम्मीद जगी है।
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