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गंगा स्नान कर मूल स्थान लौटे भगवान नारायण
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 16 Nov 2016 10:29 PM IST
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27 साल बाद बाड़ाहाट क्षेत्र पहुंची त्रियुगीनारायण भगवान की भोगमूर्ति ने बुधवार को गंगा स्नान कर क्षेत्र के लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने मूल स्थान के लिए प्रस्थान किया। बाड़ाहाट में दो दिवसीय प्रवास के दौरान भगवान नारायण के साथ आए ग्रामीणों ने गंगा में डुबकी लगाई व नगर के विभिन्न पौराणिक मंदिरों के दर्शन किए।
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बता दें कि भगवान नारायण अपना स्थान छोड़ केवल बदरीनाथ, देवप्रयाग व बाड़ाहाट क्षेत्र की यात्रा पर ही निकलते हैं। इस बार रुद्रप्रयाग जिले के फाटा पट्टी के 12 गांव के 120 ग्रामीणों ने भगवान नारायण के आदेश का पालन कर नंगे पांव पगडंडियों को लांघ देव आस्था के साथ 12 दिन की कठिन व जटिल यात्रा कर बाड़ाहाट क्षेत्र पहुंचे। यहां बाड़ाहाट के आराध्य देव कंडार देवता की अगुवाई में सैकड़ों ग्रामीणों ने स्वागत किया।
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इस ऐतिहासिक क्षण और धार्मिक व सांस्कृतिक मिलन को देखने बाड़ाहाट से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। बाड़ाहाट की देव थात चमाला की चौंरी पर विराजमान कंडार देवता ने पूरे सम्मान के साथ भगवान नारायण को विराजित किया। बुधवार सुबह गंगा स्नान कर भगवान नारायण व उनके साथ आए ग्रामीणों ने मंदिरों के दर्शन कर मूल स्थान रुद्रप्रयाग स्थित त्रियुगीनारायण के लिए प्रस्थान किया
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भगवान नारायण की डोली रात्रि को कमद में विश्राम करने के बाद बृहस्पतिवार को बूढ़ाकेदार होते हुए घुत्तूू, पंवाली कांठा को लांघ कर छह दिन बाद त्रियुगीनारायण में विराजमान होगी। इस मौके पर सुरेंद्र पुरी, शिवराम डंगवाल, रमेश सेमवाल, राकेश, गणेश डंगवाल, पदम सिंह नेगी, कृतमणी, ज्योति प्रसाद नौटियाल, डा. रामचंद्र, अरविंद उनियाल आदि मौजूद थे।