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अरबों खर्च किए फिर भी मैला ढो रही है गंगा भागीरथी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Fri, 06 May 2016 09:47 PM IST
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गंगा
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अरबों की सरकारी योजनाओं और सरकारी दावों के बावजूद गंगा भागीरथी अपने उद्गम से ही मैला ढोने को विवश है। चार साल पहले भागीरथी की बाढ़ में उत्तरकाशी जिला मुख्यालय की सीवर योजना अभी तक दुरुस्त नहीं की जा सकी है। गंगोत्री धाम में भी निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट योजना अभी तक चालू नहीं हो पाई है। यही कारण है कि जगह-जगह सीवर सीधे गंगा भागीरथी में जा रही है।
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए करीब आठ करोड़ रुपये लागत से जिला मुख्यालय पर सीवर ट्रीटमेंट योजना का निर्माण किया गया था। अगस्त 2012 और जून 2013 में भागीरथी की बाढ़ में योजना क्षतिग्रस्त हुई। बार-बार मांग करने पर बीते साल सीवर ट्रीटमेंट योजना को दुरुस्त करने के लिए 4.84 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत हुआ।
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बजट से योजना की मरम्मत की जा रही है। अनुबंध के मुताबिक जुलाई 2016 तक कार्य पूरा होना है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार के चलते तय समय में काम पूरा होने के आसार नहीं हैं। दो दिनों से जोशियाड़ा मोटर पुल से गुजर रही सीवर की राइजिंग मेन लाइन क्षतिग्रस्त होने से सीवर की गंदगी गंगा में जा रही है। उधर, गंगोत्री में बन रही 8.29 करोड़ सीवर ट्रीटमेंट योजना का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। तमाम होटल, आश्रम एवं धर्मशालाओं की गंदगी सीधे गंगा में ही बहाई जा रही है।
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उत्तरकाशी मुख्यालय की सीवर ट्रीटमेंट योजना बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब बजट मिलने पर इसे दुरुस्त कराया जा रहा है। गंगोत्री की सीवर ट्रीटमेंट योजना भी जुलाई 2016 में चालू करने का लक्ष्य है।
सुरेश पाल, परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई।