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Uttarkashi News: मनरेगा कार्यों में धांधली और गड़बड़ी की जांच की मांग
Fri, 05 Dec 2025 07:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 05 Dec 2025 07:27 PM IST
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- लिवाड़ी में ग्रामीणों ने खंड विकास कार्यालय के कर्मचारियों और अवर अभियंता पर लगाया आरोप
फोटो सहित।
मोरी (उत्तरकाशी)। मोरी विकासखंड के दूरस्थ गांव लिवाड़ी में ग्रामीणों ने खंड विकास कार्यालय के कर्मचारियों और अवर अभियंता पर मनरेगा कार्यों में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व वित्तीय वर्षों में हुए कार्यों को दोबारा दिखाकर एमबी तैयार की जा रही है, जबकि धरातल पर अभी तक कोई नया काम शुरू नहीं हुआ है।
स्थानीय निवासी तथा मानवाधिकार कानून एवं सुरक्षात्मक भ्रष्टाचार निवारण के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश सिंह ने सीडीओ, डीडीओ और मनरेगा अधिकारियों को पत्र सौंपकर सभी कार्यों के स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नवनिर्वाचित पंचायत गठन के बाद न तो खुली बैठक हुई है और न ही कोई योजना स्वीकृत हुई है, फिर भी बिना भौतिक परीक्षण के एमबी बनाकर ऑनलाइन अपलोड की जा रही है और लगभग 20 लाख रुपये के कार्यों की फर्जी एमबी तैयार हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना योजना स्वीकृति के दो स्टीमेट भी बनाए गए हैं और ऑनलाइन मैरियट के माध्यम से कार्य प्रगति दर्शाई जा रही है, जबकि धरातल पर कार्य शून्य है। इस पर बीडीओ शशिभूषण बेंजवाल का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई शिकायत उनके कार्यालय में प्राप्त नहीं हुई है।
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फोटो सहित।
मोरी (उत्तरकाशी)। मोरी विकासखंड के दूरस्थ गांव लिवाड़ी में ग्रामीणों ने खंड विकास कार्यालय के कर्मचारियों और अवर अभियंता पर मनरेगा कार्यों में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व वित्तीय वर्षों में हुए कार्यों को दोबारा दिखाकर एमबी तैयार की जा रही है, जबकि धरातल पर अभी तक कोई नया काम शुरू नहीं हुआ है।
स्थानीय निवासी तथा मानवाधिकार कानून एवं सुरक्षात्मक भ्रष्टाचार निवारण के प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश सिंह ने सीडीओ, डीडीओ और मनरेगा अधिकारियों को पत्र सौंपकर सभी कार्यों के स्थलीय निरीक्षण और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नवनिर्वाचित पंचायत गठन के बाद न तो खुली बैठक हुई है और न ही कोई योजना स्वीकृत हुई है, फिर भी बिना भौतिक परीक्षण के एमबी बनाकर ऑनलाइन अपलोड की जा रही है और लगभग 20 लाख रुपये के कार्यों की फर्जी एमबी तैयार हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना योजना स्वीकृति के दो स्टीमेट भी बनाए गए हैं और ऑनलाइन मैरियट के माध्यम से कार्य प्रगति दर्शाई जा रही है, जबकि धरातल पर कार्य शून्य है। इस पर बीडीओ शशिभूषण बेंजवाल का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई शिकायत उनके कार्यालय में प्राप्त नहीं हुई है।
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