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Uttarkashi News: गणेशपुर गांव नहरें क्षतिग्रस्त होने से खेती और घराट को नुकसान
Thu, 29 May 2025 06:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 29 May 2025 06:59 PM IST
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पानी नहीं होने से खेती भी सूखने के कगार पर
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के गणेशुपर गांव में सिंचाई विभाग क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां पर करीब आठ घराट का संचालन बंद पड़ा है। वहीं नहर में पानी नहीं होने के कारण खेती भी अब सूखने के कगार पर है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई। साथ ही घराट के लिए टिहरी रियासत के समय से ही जिला प्रशासन को कर दिया जाता है।
गणेशपुर के ग्राम प्रधान सुनील नेगी, कमल राणा, विवेक, चंदर सिंह, संदीप बधाणी, देवेंद्र डोभाल, जगतराम, भगतराम, राजेश, आनंद राम का कहना है कि गत छह माह से गांव के खेतों को सिंचित करने वाली नहर का शुरुआती मुहाना क्षतिग्रस्त पड़ा है, लेकिन उसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। वहीं नहर में पानी नहीं होने के कारण ग्रामीणों की खेती के साथ आजीविका पर भी बुरा असर पड़ रहा है। क्योंकि इस नहर के पानी से करीब आठ घराटों का संचालन होता है।
उसमें से एक से बिजली का उत्पादन किया जाता है। साथ ही दूसरी ओर खेती भी अब पूरी तरह सूख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि घराट का वह प्रदेश सरकार को टिहरी रियासत के समय से कर भी देते हैं, लेकिन उसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से सिंचाई नहर की देखरेख के लिए कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन को कई बार लिखित दिया गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड के गणेशुपर गांव में सिंचाई विभाग क्षतिग्रस्त होने के कारण वहां पर करीब आठ घराट का संचालन बंद पड़ा है। वहीं नहर में पानी नहीं होने के कारण खेती भी अब सूखने के कगार पर है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई। साथ ही घराट के लिए टिहरी रियासत के समय से ही जिला प्रशासन को कर दिया जाता है।
गणेशपुर के ग्राम प्रधान सुनील नेगी, कमल राणा, विवेक, चंदर सिंह, संदीप बधाणी, देवेंद्र डोभाल, जगतराम, भगतराम, राजेश, आनंद राम का कहना है कि गत छह माह से गांव के खेतों को सिंचित करने वाली नहर का शुरुआती मुहाना क्षतिग्रस्त पड़ा है, लेकिन उसकी कोई सुध नहीं ले रहा है। वहीं नहर में पानी नहीं होने के कारण ग्रामीणों की खेती के साथ आजीविका पर भी बुरा असर पड़ रहा है। क्योंकि इस नहर के पानी से करीब आठ घराटों का संचालन होता है।
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उसमें से एक से बिजली का उत्पादन किया जाता है। साथ ही दूसरी ओर खेती भी अब पूरी तरह सूख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि घराट का वह प्रदेश सरकार को टिहरी रियासत के समय से कर भी देते हैं, लेकिन उसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से सिंचाई नहर की देखरेख के लिए कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन को कई बार लिखित दिया गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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