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टमाटर का सही मूल्य नहीं मिलने से काश्तकार परेशान
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नकदी फसल के उत्पादन में प्रदेश की अग्रणी रवाईं घाटी के काश्तकारों के समक्ष आजीविका का संकट पैदा हो गया है। पहले बारिश कम होने और अब मंडी में टमाटर का उचित मूल्य न मिलने से काश्तकार बीज का पैसा भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं। घाटी के काश्तकारों ने प्रदेश सरकार से किसानों का कृषि ऋण माफ करने की मांग की है।
पुरोला क्षेत्र के कमल सिराई एवं रामा सिराई में आजकल टमाटर की फसल की बिक्री की जा रही है। कमल घाटी ग्राम्य स्वायत्त सहकारिता फेडरेशन के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राणा, काश्तकार शरत राम नौटियाल, सोवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि रर्वाइं घाटी में टमाटर उत्पादन से काश्तकार प्रति वर्ष करीब डेढ़ करोड़ का व्यवसाय करते हैं, लेकिन इस वर्ष टमाटर की फसल लगाने के दौरान पहले सूखे की मार व अब टमाटर का उचित मूल्य न मिलने के कारण काश्तकार परेशान हैं। काश्तकारों को मंडी में एक किलो टमाटर का मात्र आठ रुपये मिल रहा है, जबकि पहले एक किलो टमाटर का 30 रुपये तक मिल जाता था। ट्रक का भाड़ा, खाद आदि का खर्चा निकालने के बाद काश्तकार को बीज का पैसा भी नहीं बच रहा है। जबकि काश्तकारों ने फसल के लिए कृषि ऋण भी लिया हुआ है। आमदनी न होने से काश्तकारों के समक्ष कृषि ऋण चुकाना भी एक चुनौती बन गया है।
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पुरोला क्षेत्र के कमल सिराई एवं रामा सिराई में आजकल टमाटर की फसल की बिक्री की जा रही है। कमल घाटी ग्राम्य स्वायत्त सहकारिता फेडरेशन के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह राणा, काश्तकार शरत राम नौटियाल, सोवेंद्र सिंह राणा ने बताया कि रर्वाइं घाटी में टमाटर उत्पादन से काश्तकार प्रति वर्ष करीब डेढ़ करोड़ का व्यवसाय करते हैं, लेकिन इस वर्ष टमाटर की फसल लगाने के दौरान पहले सूखे की मार व अब टमाटर का उचित मूल्य न मिलने के कारण काश्तकार परेशान हैं। काश्तकारों को मंडी में एक किलो टमाटर का मात्र आठ रुपये मिल रहा है, जबकि पहले एक किलो टमाटर का 30 रुपये तक मिल जाता था। ट्रक का भाड़ा, खाद आदि का खर्चा निकालने के बाद काश्तकार को बीज का पैसा भी नहीं बच रहा है। जबकि काश्तकारों ने फसल के लिए कृषि ऋण भी लिया हुआ है। आमदनी न होने से काश्तकारों के समक्ष कृषि ऋण चुकाना भी एक चुनौती बन गया है।
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