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सीएम के बयान पर गंगोत्री व यमुनोत्री धामों के तीर्थपुरोहितों ने जताया रोष
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गगोत्री धाम में देवस्थानम बोर्ड के विरोध में धरना देते तीर्थपुरोहित।
- फोटो : UTTER KASHI
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मुख्यमंत्री द्वारा चारधाम यात्रा का विरोध कर रहे तीर्थपुरोहितों को कांग्रेसी कहे जाने पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के पुरोहितों ने नाराजगी जताई है। आक्रोशित पुरोहितों ने सीएम से अपना बयान वापस लेने की मांग की है। साथ ही ऐसा नहीं करने पर चारों धामों में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इस बीच पुुरोहितों ने चारधाम यात्रा व देवस्थानम बोर्ड के विरोध में विरोध प्रदर्शन किया।
गंगोत्री धाम परिसर में चारधाम यात्रा व देवस्थानम बोर्ड के विरोध में रविवार को 33वें दिन भी तीर्थपुरोहितों का धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान गंगोत्री तीर्थ पुरोहित महासभा व गंगोत्री व्यापार संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सभी पुरोहितों व हक हकूकधारियों ने सीएम द्वारा दिए गए बयान पर नाराजगी जताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया।
मंदिर समिति के महासचिव दीपक सेमवाल ने कहा कि पुरोहितों व ग्रामीणों द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षात्मक उपायों के कारण चारों धाम अभी तक कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं, लेकिन सरकार की तरफ से पूरे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा खोलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जिसे देखते हुए पुरोहित समाज ने धाम क्षेत्र में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने व मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं कराने का निर्णय लिया है। इस मौके पर राजेश सेमवाल, राकेश सेमवाल, मुकेश सेमवाल, महेश सेमवाल सहित कई मौजूद थे।
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उधर, खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में प्रदर्शन कर रहे यमुनोत्री धाम के पुरोहितों ने भी सीएम के बयान पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज अपने हक हकूकों व कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन पुरोहितों की भावनाओं को समझने के बजाय सीएम उन पर कांग्रेसी होने का आरोप लगा रहे हैं, जो सरासर गलत है। विरोध जताने वालों में पंच पंडा समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश उनियाल, रमण प्रसाद उनियाल, मनमोहन उनियाल, प्यारेलाल उनियाल आदि शामिल रहे।
देवस्थानम बोर्ड के विरोध में केदारनाथ में धरना जारी
मास्टर प्लान के तहत हो रहे कार्यों पर जताई आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड और केदारनाथ में मास्टर प्लान से हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों के विरोध में तीर्थ पुरोहितों का धरना जारी रहा। उन्होंने सरकार पर तीर्थ पुरोहित व हक-हकूकधारियों के हितों की अनदेखी का आरोप भी लगाया। कहा कि जब तक देवस्थानम बोर्ड को भंग नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी के नेतृत्व में तीर्थ पुरोहितों ने केदारनाथ मंदिर परिसर में धरना दिया। इस मौके पर केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना था कि सरकार द्वारा तीर्थ पुरोहितों को बिना विश्वास में लिए देवस्थानम बोर्ड गठित किया गया है। साथ ही बिना व्यवस्थाओं के यात्रा का संचालन किया जा रहा है, जिससे यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने मास्टर प्लान से हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों का भी विरोध किया। कहा कि जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में व्यापक नुकसान हुआ था, जिसमें तीर्थ पुरोहितों के आवासीय व व्यापारिक प्रतिष्ठान भी सैलाब में बह गए थे। लेकिन अब, सरकार मास्टर प्लान के तहत धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के नाम पर उनकी संपत्तियों को ध्वस्त करने के लिए निशान लगा रही है। धरना देने वालों में रमाकांत शर्मा, अशोक शुक्ला, शशि अवस्थी, गजेंद्र नेगी, योगेंद्र प्रसाद, एलएस राणा, नवीन शुक्ला, जमुना प्रसाद समेत अन्य मौजूद थे।
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गंगोत्री धाम परिसर में चारधाम यात्रा व देवस्थानम बोर्ड के विरोध में रविवार को 33वें दिन भी तीर्थपुरोहितों का धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान गंगोत्री तीर्थ पुरोहित महासभा व गंगोत्री व्यापार संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सभी पुरोहितों व हक हकूकधारियों ने सीएम द्वारा दिए गए बयान पर नाराजगी जताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया।
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मंदिर समिति के महासचिव दीपक सेमवाल ने कहा कि पुरोहितों व ग्रामीणों द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षात्मक उपायों के कारण चारों धाम अभी तक कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं, लेकिन सरकार की तरफ से पूरे देशभर के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा खोलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। जिसे देखते हुए पुरोहित समाज ने धाम क्षेत्र में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने व मंदिरों में पूजा अर्चना नहीं कराने का निर्णय लिया है। इस मौके पर राजेश सेमवाल, राकेश सेमवाल, मुकेश सेमवाल, महेश सेमवाल सहित कई मौजूद थे।
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उधर, खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में प्रदर्शन कर रहे यमुनोत्री धाम के पुरोहितों ने भी सीएम के बयान पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज अपने हक हकूकों व कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन पुरोहितों की भावनाओं को समझने के बजाय सीएम उन पर कांग्रेसी होने का आरोप लगा रहे हैं, जो सरासर गलत है। विरोध जताने वालों में पंच पंडा समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश उनियाल, रमण प्रसाद उनियाल, मनमोहन उनियाल, प्यारेलाल उनियाल आदि शामिल रहे।
देवस्थानम बोर्ड के विरोध में केदारनाथ में धरना जारी
मास्टर प्लान के तहत हो रहे कार्यों पर जताई आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड और केदारनाथ में मास्टर प्लान से हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों के विरोध में तीर्थ पुरोहितों का धरना जारी रहा। उन्होंने सरकार पर तीर्थ पुरोहित व हक-हकूकधारियों के हितों की अनदेखी का आरोप भी लगाया। कहा कि जब तक देवस्थानम बोर्ड को भंग नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी के नेतृत्व में तीर्थ पुरोहितों ने केदारनाथ मंदिर परिसर में धरना दिया। इस मौके पर केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना था कि सरकार द्वारा तीर्थ पुरोहितों को बिना विश्वास में लिए देवस्थानम बोर्ड गठित किया गया है। साथ ही बिना व्यवस्थाओं के यात्रा का संचालन किया जा रहा है, जिससे यहां पहुंच रहे श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने मास्टर प्लान से हो रहे पुनर्निर्माण कार्यों का भी विरोध किया। कहा कि जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में व्यापक नुकसान हुआ था, जिसमें तीर्थ पुरोहितों के आवासीय व व्यापारिक प्रतिष्ठान भी सैलाब में बह गए थे। लेकिन अब, सरकार मास्टर प्लान के तहत धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के नाम पर उनकी संपत्तियों को ध्वस्त करने के लिए निशान लगा रही है। धरना देने वालों में रमाकांत शर्मा, अशोक शुक्ला, शशि अवस्थी, गजेंद्र नेगी, योगेंद्र प्रसाद, एलएस राणा, नवीन शुक्ला, जमुना प्रसाद समेत अन्य मौजूद थे।