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नहाते समय टिहरी बांध की झील में डूबा बालक
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चरिन्यालीसौड़ झील में डूबे युवक की तलाश में रेस्क्यू चलाते पुलिस और एसडीआरएफ के जवान।
- फोटो : UTTER KASHI
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पीपलमंडी के निकट टिहरी बांध झील के किनारे नहाते हुए पैर फिसलने से एक बालक झील में डूब गया। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने खोजबीन शुरू कर दी है।
चिन्यालीगांव निवासी हरीश कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब नौ बजे वह पशुओं के लिए पानी लेने पीपलमंडी में झील किनारे गए थे। उनके साथ उनका पांच साल का बेटा सार्थक और बड़े भाई प्रमोद कुमार का दस वर्षीय बेटा प्रभात भी गया था। वह पानी भरकर लौट आए, लेकिन दोनों बच्चे झील के किनारे जल संस्थान की टूटी हुई पाइप लाइन से बह रहे पानी में नहाने लगे। थोड़ी देर बाद सार्थक रोते हुए घर पहुंचा और उसने भाई प्रभात के झील में डूबने की जानकारी दी। सूचना पर थानाध्यक्ष विनोद थपलियाल के नेतृत्व में पुलिस, एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम द्वारा झील में डूबे बालक की तलाश की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। झील में डूबा प्रभात अपनी चार बहनों का इकलौता भाई था।
टिहरी बांध झील में आए दिन इस तरह की घटनाएं होने के बावजूद झील के किनारे सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने पर स्थानीय लोगों में रोष है। पूर्व पालिकाध्यक्ष शूरवीर सिंह रांगड़, कृष्णा नौटियाल, खिमानंद बिजल्वाण ने कहा कि वर्ष 2006 में टिहरी बांध झील का विस्तार चिन्यालीसौड़ तक होने के बाद से ही यहां खतरा बना हुआ है। कई बार टीएचडीसी प्रशासन से झील किनारे सुरक्षा इंतजामों की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीते सालों में करीब 12 लोगों की झील में डूबने से मौत हो चुकी है।
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चिन्यालीगांव निवासी हरीश कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब नौ बजे वह पशुओं के लिए पानी लेने पीपलमंडी में झील किनारे गए थे। उनके साथ उनका पांच साल का बेटा सार्थक और बड़े भाई प्रमोद कुमार का दस वर्षीय बेटा प्रभात भी गया था। वह पानी भरकर लौट आए, लेकिन दोनों बच्चे झील के किनारे जल संस्थान की टूटी हुई पाइप लाइन से बह रहे पानी में नहाने लगे। थोड़ी देर बाद सार्थक रोते हुए घर पहुंचा और उसने भाई प्रभात के झील में डूबने की जानकारी दी। सूचना पर थानाध्यक्ष विनोद थपलियाल के नेतृत्व में पुलिस, एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम द्वारा झील में डूबे बालक की तलाश की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। झील में डूबा प्रभात अपनी चार बहनों का इकलौता भाई था।
टिहरी बांध झील में आए दिन इस तरह की घटनाएं होने के बावजूद झील के किनारे सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाने पर स्थानीय लोगों में रोष है। पूर्व पालिकाध्यक्ष शूरवीर सिंह रांगड़, कृष्णा नौटियाल, खिमानंद बिजल्वाण ने कहा कि वर्ष 2006 में टिहरी बांध झील का विस्तार चिन्यालीसौड़ तक होने के बाद से ही यहां खतरा बना हुआ है। कई बार टीएचडीसी प्रशासन से झील किनारे सुरक्षा इंतजामों की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीते सालों में करीब 12 लोगों की झील में डूबने से मौत हो चुकी है।
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