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बहुरेंगे रैथल के पंचपुरा भवन के दिन
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Mon, 04 Jan 2016 10:23 PM IST
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नया साल दयारा के प्रमुख पड़ाव रैथल गांव के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। ग्रीन पीपुल संस्था ने गांव में स्थित करीब पांच सौ साल पुराने पहाड़ी वास्तुकला के मॉडल पंचपुरा भवन को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने का बीड़ा उठाया है।
सोमवार को इस कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। संस्था यहां कलक्शन सेंटर बनाकर क्षेत्र के स्थानीय जैविक उत्पादों को भी बड़ा बाजार मुहैया कराएगी। इस परियोजना को क्षेत्र की युवतियां संचालित करेंगी।
भटवाड़ी ब्लाक के रैथल गांव स्थित लकड़ी और पत्थर से बना पंचपुरा भवन पहाड़ की अनूठी वास्तुकला एवं भूकंपरोधी तकनीकी का अद्भुत मॉडल है। करीब पांच सौ साल पहले गांव के वीर भड़ राणा गंभीरू ने भवन का निर्माण कराया था।
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तब से कई भूकंप झेल चुका भवन आज भी जस का तस खड़ा है। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल की पहल पर ग्रीन पीपुल संस्था ने भवन का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया है। राणा गंभीरू के वंशज कुशल सिंह राणा, कमल राणा, ज्ञानेंद्र राणा, वीर सिंह राणा आदि ने भी इस पर सहमति जताई है।
सोमवार को अनुष्ठान के साथ भवन के जीर्णोद्धार का विधिवत शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि कर्नल कोठियाल ने कहा कि भवन को देखने के लिए ही बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आएंगे। साथ ही यहां स्थानीय जैविक उत्पादों के विपणन की ठोस व्यवस्था होने से ग्रामीणों की आजीविका भी मजबूत होगी।
उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना की। प्रधान श्यामा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकेंद्र पंवार, गजेंद्र राणा, महेंद्र पोखरियाल आदि ने क्षेत्र हित के इस कार्य के लिए कर्नल कोठियाल एवं ग्रीन पीपुल संस्था का आभार जताया।
ऐसे प्रोजेक्ट से रुकेगा पहाड़ों से पलायन
ग्रीन पीपुल संस्था के प्रतिनिधि पीके सिंह एवं संजीव ने बताया कि संस्था का प्रयास गांव में ही स्वरोजगार के साधन विकसित करना है। इससे पहाड़ी इलाकों से बढ़ते पलायन पर रोक लगेगी।
संस्था पर्यटन के साथ ही जैविक उत्पादों को बाजार मुहैया कराने में ग्रामीणों की मदद करेगी। कार्बन डेटिंग के माध्यम से पंचपुरा भवन करीब पांच सौ साल पुराना होने की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों को यहां लाकर इसको संरक्षित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को क्षेत्र के गांवों की युवतियां संचालित करेंगी।
महिलाओं का सम्मान किया परियोजना ने
पंचपुरा भवन के जीर्णोद्धार तथा जैविक उत्पाद कलक्शन सेंटर की कमान संभाल रही भंकोली गांव की ममता रावत, नाल्ड की मंजू एवं भुक्की की सुमिला ने बताया कि गांव की लड़कियों पर विश्वास जताकर संस्था ने सही मायने में महिलाओं का सम्मान किया है। क्षेत्र के अन्य गांवों की युवतियों को परियोजना से जोड़कर इसे हर हाल में सफल बनाएंगे।
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सोमवार को इस कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। संस्था यहां कलक्शन सेंटर बनाकर क्षेत्र के स्थानीय जैविक उत्पादों को भी बड़ा बाजार मुहैया कराएगी। इस परियोजना को क्षेत्र की युवतियां संचालित करेंगी।
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भटवाड़ी ब्लाक के रैथल गांव स्थित लकड़ी और पत्थर से बना पंचपुरा भवन पहाड़ की अनूठी वास्तुकला एवं भूकंपरोधी तकनीकी का अद्भुत मॉडल है। करीब पांच सौ साल पहले गांव के वीर भड़ राणा गंभीरू ने भवन का निर्माण कराया था।
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तब से कई भूकंप झेल चुका भवन आज भी जस का तस खड़ा है। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल की पहल पर ग्रीन पीपुल संस्था ने भवन का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया है। राणा गंभीरू के वंशज कुशल सिंह राणा, कमल राणा, ज्ञानेंद्र राणा, वीर सिंह राणा आदि ने भी इस पर सहमति जताई है।
सोमवार को अनुष्ठान के साथ भवन के जीर्णोद्धार का विधिवत शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि कर्नल कोठियाल ने कहा कि भवन को देखने के लिए ही बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आएंगे। साथ ही यहां स्थानीय जैविक उत्पादों के विपणन की ठोस व्यवस्था होने से ग्रामीणों की आजीविका भी मजबूत होगी।
उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना की। प्रधान श्यामा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकेंद्र पंवार, गजेंद्र राणा, महेंद्र पोखरियाल आदि ने क्षेत्र हित के इस कार्य के लिए कर्नल कोठियाल एवं ग्रीन पीपुल संस्था का आभार जताया।
ऐसे प्रोजेक्ट से रुकेगा पहाड़ों से पलायन
ग्रीन पीपुल संस्था के प्रतिनिधि पीके सिंह एवं संजीव ने बताया कि संस्था का प्रयास गांव में ही स्वरोजगार के साधन विकसित करना है। इससे पहाड़ी इलाकों से बढ़ते पलायन पर रोक लगेगी।
संस्था पर्यटन के साथ ही जैविक उत्पादों को बाजार मुहैया कराने में ग्रामीणों की मदद करेगी। कार्बन डेटिंग के माध्यम से पंचपुरा भवन करीब पांच सौ साल पुराना होने की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों को यहां लाकर इसको संरक्षित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को क्षेत्र के गांवों की युवतियां संचालित करेंगी।
महिलाओं का सम्मान किया परियोजना ने
पंचपुरा भवन के जीर्णोद्धार तथा जैविक उत्पाद कलक्शन सेंटर की कमान संभाल रही भंकोली गांव की ममता रावत, नाल्ड की मंजू एवं भुक्की की सुमिला ने बताया कि गांव की लड़कियों पर विश्वास जताकर संस्था ने सही मायने में महिलाओं का सम्मान किया है। क्षेत्र के अन्य गांवों की युवतियों को परियोजना से जोड़कर इसे हर हाल में सफल बनाएंगे।