गंगा विश्व धरोहर मंच ने गौरेया के संरक्षण के लिए अनूठा अभियान शुरू किया है। विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) तक चलने वाले अभियान में गंगा तटों सहित आसपास के इलाकों में नारियल के रेशों से निर्मित कृत्रिम घोंसले लगाए जाएंगे। बुुधवार गंगा आरती स्थल पंजाब सिंध क्षेत्र में कृत्रिम घोंसले लगाकर अभियान का शुभारंभ किया गया।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम संयोजक डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने कहा कि गौरैया का कम या विलुप्त होना इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक आवास तेजी से सिमट रहे हैं, जबकि गौरैया जैसे जीवों का अस्तित्व पर्यावरण व पारिस्थितिक तंत्र के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। पीजी कालेज रसायन विभाग के प्राध्यापक डॉ. तिलक राम प्रजापति ने कहा कि गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खास भूमिका है। आज इंसान की भोगवादी संस्कृति ने उसे हमसे दूर कर दिया है। सेवानिवृत्त प्राचार्य सुरेंद्र दत्त उनियाल ने कहा कि हमें गौरैया के घोंसलों के लिए सुरक्षित जगह पर लगाकर उन्हें प्राकृतिक वातावरण देना होगा। गंगा आरती समिति के चंद्र शेखर भट्ट व नेहरू युवा केंद्र नमामि गंगे के परियोजना अधिकारी उत्तम पंवार ने इस अभियान की सराहना की। इस मौके पर रोहित कुमार, प्रवेश पंवार, अजय पाल, आदर्श डंगवाल, शिव गोपाल उनियाल, दुर्गेश तथा दीपक आदि मौजूद रहे।