फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   Apple orchards were ruined due to disease in Yamuna Ghati

यमुनाघाटी में बीमारी से सेब के बगीचे हुए बर्बाद

Wed, 25 Aug 2021 07:32 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 25 Aug 2021 07:32 PM IST
विज्ञापन
Apple orchards were ruined due to disease in Yamuna Ghati
यमुनाघाटी की स्योरी फल पट्टी में मार्सोनिना ब्लोच बीमारी से सेब के बगीचे बर्बाद हो रहे हैं। काश्तकारों ने डीएम से फलपट्टी में कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की टीम भेजने की मांग की है।
विज्ञापन

यमुना घाटी की सबसे बड़ी स्योरी फलपट्टी में प्रत्येक वर्ष करीब एक लाख पेटी सेब का उत्पादन होता है। पिछले कुछ सालों से सेब के पेड़ बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। इसमें पेड़ों की पत्तियां पीली पड़ने के बाद सूख कर झड़ रही हैं। साथ ही सेब के दानों का आकार नहीं बढ़ पा रहा है। जिस पौधे की पत्तियों पर पीलापन का असर ज्यादा है, वह धीरे-धीरे सूख रहा है। काश्तकार कई तरह की कीटनाशक और फफूंदी नाशक दवाइयों का छिड़काव करने के बाद भी इस बीमारी की रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष 2020 की तुलना में इस सीजन में करीब 60 प्रतिशत उत्पादन कम हुआ है, जिसे इस बीमारी से जोड़ कर माना जा रहा है। सेब काश्तकार गजेंद्र नौटियाल का कहना है कि वर्ष 2020 में उनके बगीचे से सेब की एक हजार पेटी निकली थी। इस समय सिर्फ ढाई सौ पेटी निकली है। आनंद बिजल्वाण ने बताया कि पिछले सीजन में 600 पेटी का उत्पादन हुआ था। इस समय उनकी सिर्फ 250 पेटी सेब निकली है। प्रेम सिंह राणा, सोवेंद्र सिंह रावत, राकेश राणा आदि काश्तकारों का कहना है कि पौध के लिए पत्तियां ही खुराक का काम करती हैं। जब पत्तियां ही समय से पहले सूख कर झड़ जाएगी, तो उत्पादन पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
विज्ञापन

वर्ष 2012 में पहली बार सामने आई थी ये बीमारी
कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के उद्यान विशेषज्ञ डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि जनपद में वर्ष 2012 में हर्षिल घाटी में पहली बार मार्सोनिना ब्लोच बीमारी सामने आई थी। नौगांव क्षेत्र से पहली बार इस बीमारी की सूचना मिली है, जो इस मौसम में फंगस के कारण होती है। उन्होंने काश्तकारों को बीमार ग्रस्त पत्तियों को हटाने की सलाह दी। बताया कि तीन चौथाई मेन्कोजेब और एक चौथाई कार्बेन्डाजिम दवाओं का 200 ग्राम मिश्रण 100 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करने से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बताया कि इन दवाओं का मिश्रण कम्पेनियन नाम से भी उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed