मनरेगा के कार्यों में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों का समाधान नहीं होने से गुस्साए ग्राम प्रधानों ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। शासन- प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानों ने डीएम को ज्ञापन सौंपा। साथ ही मांगों का निस्तारण नहीं होने पर आगामी दो अक्तूबर से होने वाली ग्राम पंचायतों की बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान किया।
सोमवार को बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए प्रधानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। प्रधान संगठन के प्रदेश महामंत्री प्रताप रावत ने कहा कि कोरोना काल में बड़ी संख्या में प्रवासी अपने घर गांव लौटे हैं। सरकार की मंशा मनरेगा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराने की है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के मनमाने रवैये के कारण इसमें दिक्कतें आ रही हैं। प्रधानों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर मनरेगा कनिष्ठ अभियंताओं के रिक्त पदों को शीघ्र भरने, खेतों की सुरक्षा दीवार एवं चेकडैम, घेरबाड़ आदि कार्यों पर लगी रोक हटाने, मनरेगा में पांच लाख से अधिक के कार्यों को स्वीकृति देने, योजना का कार्य पूरा होते ही निर्माण सामग्री का भुगतान कराने व ग्राम पंचायत की खुली बैठक में अनुमोदित योजनाओं पर ही कार्य कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा में कार्य दिवस एवं मजदूरी बढ़ाने की मांग भी की। विरोध प्रदर्शन करने वालों में नौगांव प्रधान संगठन के अध्यक्ष बलवंत रावत, चिन्यालीसौड़ के अध्यक्ष कोमल राणा, डुंडा की अध्यक्ष सुनीता नेगी, चंद्रशेखर पंवार, संदीप रावत, सुरेंद्र पाल, राममोहन उनियाल, महेश नौटियाल, धर्मवीर परमार, संदीप सेमवाल, श्यालिकराम भट्ट दर्जनों ग्राम प्रधान शामिल रहे।