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फिर उठा इको सेंसिटिव जोन का मुद्दा

Mon, 07 Feb 2022 10:39 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 10:39 PM IST
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Again the issue of eco sensitive zone arose
पर्यावरण बनाम विकास के बीच बहस को जन्म देने वाला इको सेंसिटिव जोन का मुद्दा इस विधानसभा चुनाव में फिर उठा है। वर्ष 2012 में केंद्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गंगोत्री से उत्तरकाशी तक के 100 किमी क्षेत्र को इको सेेंसिटिव जोन घोषित किया था। अपने शासन काल में इस कानून पर चुप्पी साधे रहने के बाद अब भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बना रही है। भाजपा का आरोप है कि जोन का विरोध होने पर राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसकी वापसी के प्रस्ताव को स्वीकार किया था, जिस पर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने पोस्टर भी चस्पा किए। लेकिन आज भी बरकरार है।
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उत्तरकाशी से गंगोत्री तक इको सेंसिटिव जोन लागू होने से कई तरह की बंदिशें लगी हैं, जिसमें भागीरथी नदी किनारे 200 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक लगाई गई। साथ ही पर्यावरण से छेड़छाड़ भी प्रतिबंधित की गई। यही वजह है कि वर्ष 2016 में चारधामों के लिए केंद्र सरकार ने जब 12 हजार करोड़ की ऑलवेदर रोड का शिलान्यास किया, तो उक्त जोन की वजह से योजना पर काम उत्तरकाशी से आगे नहीं बढ़ पाया। इसके अलावा कई विकास योजनाएं भी इको सेंसिटिव जोन के चलते प्रस्ताव से आगे नहीं बढ़ पाई। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दे के रूप में सामने आया। बाद में 2017 के चुनाव में भी इको सेंसिटिव जोन के विरोध का मुद्दा उठा। अब एक बार फिर वर्ष 2022 के चुनाव में भी यह मुद्दा बनकर दोबारा सामने आया है। खासतौर पर भाजपा ने कांग्रेस के जोन वापसी के प्रस्ताव के समर्थन में उस समय लगाए पोस्टरों को बाहर निकाला है। इन पोस्टरों के आधार पर अब भाजपा कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रही है।
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-उस समय विजय बहुगुणा के कहने पर कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लगाए थे। आज विजय बहुगुणा भाजपा में हैं। कांग्रेस ने कानून वापसी का प्रयास तो किया था, लेकिन डबल इंजन की सरकार ने इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए।
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-जगमोहन रावत, जिलाध्यक्ष कांग्रेस उत्तरकाशी।
किसी भी कानून के चलते सामान्य मानवीय जन जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस कानून का कुछ गलत प्रभाव पड़ा है तो इसका दोबारा अध्ययन कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे।
-रमेश चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा उत्तरकाशी।
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