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नदियों के तटवर्ती हिस्सों में बन रहे भवन

Sun, 23 Jun 2019 10:04 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jun 2019 10:04 PM IST
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नदियों के तटवर्ती हिस्सों में बन रहे भवन
उत्तरकाशी। वर्ष 2013 की आपदा को छह साल पूरे हो गए हैं। गंगा भागीरथी एवं असी गंगा समेत अन्य नदियों में बाढ़ का मलबा अब भी जमा होने से रीवर बैड ऊंचा होने के कारण तटवर्ती हिस्सों पर खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद नदियों के किनारे धड़ल्ले से भवनों का निर्माण हो रहा है। यहां तक कि जोशियाड़ा में बाढ़ में तबाह हुई बस्ती से पुनर्वासित किए गए परिवार फिर पुरानी जगहों पर बस गए हैं।
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29 जुलाई और तीन अगस्त 2012 को गंगा भागीरथी एवं यमुना नदी के साथ ही असी गंगा, हनुमान गंगा और स्वारी गाड में आई भीषण बाढ़ ने जिले में भारी तबाही मचाई थी। इसके बाद 16 व 17 जून को दोबारा बाढ़ आने से कई बहुमंजिले भवन, सड़क एवं पुल समेत तमाम सार्वजनिक परिसंपत्तियां बह गई थी। इससे जिले में 14 लोगों की मौत होने के साथ ही करीब तीन दर्जन लोग घायल हुए थे। 249 भवन बहे और 2494 भवन आंशिक एवं तीक्ष्ण क्षतिग्रस्त हुए थे और 339 हेक्टेयर कृषि भूमि तबाह हो गई थी।
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आपदा के छह साल जिला मुख्यालय क्षेत्र में आसीसी दीवार के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी सुरक्षा दीवार बनी, लेकिन नदियों में बाढ़ के बाद जमा मलबा अभी तक नहीं हटाने से नदी तल ऊंचा हो गया है। ईको सेंसिटिव जोन सहित पर्यावरणीय नियमों के चलते मलबे को नहीं हटाया जा सका है।
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पुनर्वास के बाद फिर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बसे लोग
वर्ष 2012-13 में गंगा भागीरथी की बाढ़ में जोशियाड़ा का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था। तब सरकार ने पीड़ित परिवारों को मानकों के अनुसार मुआवजा वितरित करने के साथ ही सुरक्षित स्थानों पर घर बनवाकर इन परिवारों का पुनर्वास भी कराया था। बाढ़ के दौरान कोई तटवर्ती हिस्सों में बसने की सोच भी नहीं रहा था, लेकिन अब फिर से तटवर्ती हिस्सों में धड़ल्ले से भवनों का निर्माण शुरू हो गया है। मुआवजा भुगतान और पुनर्वास के बाद पुन: यहां भवनों का निर्माण होने पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

नदियों के तटवर्ती हिस्सों में निश्चित दूरी के भीतर भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध है। यदि कहीं इसका उल्लंघन हो रहा है तो उसे दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी। गंगोत्री धाम समेत कुछ अन्य हिस्सों में रीवर बैड ऊंचा होने से उत्पन्न खतरे का आकलन करने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट को लिखा गया है।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
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