{"_id":"5d0d0cb48ebc3e520f30bd38","slug":"156113629317-utter-kashi-news169","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑल वेदर रोड के आधे अधूरे कार्यों से मानसून सीजन में मंडरा रहा भूस्खलन का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑल वेदर रोड के आधे अधूरे कार्यों से मानसून सीजन में मंडरा रहा भूस्खलन का खतरा
विज्ञापन
उत्तरकाशी। आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील उत्तरकाशी जिले में जगह-जगह चल रहे ऑल वेदर रोड के निर्माण कार्यों के चलते गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे पर भूस्खलन और भूधंसाव का खतरा बढ़ गया है। इस साल प्री मानसून सीजन में कम बारिश होने के बावजूद यमुनोत्री हाईवे दो बार बाधित हो चुका है, जबकि बीते वर्ष गंगोत्री हाईवे भी कई बार अवरुद्ध हुआ था। ऐसे में आगामी मानसून सीजन के दौरान एक बार फिर से हाईवे बाधित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
जिले में ऑल वेदर रोड के तहत जगह-जगह चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए पहाड़ों को खोदा गया है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। आलम यह है कि यमुनोत्री हाईवे मई-जून माह में हल्की बारिश से ही खरादी तथा सिलक्यारा बैंड के पास चल रहे सड़क निर्माण कार्य के कारण दो बार अवरुद्ध हो चुका है। यात्रा मार्ग पर बाईपास रोड की व्यवस्था नहीं होने से मार्ग अवरुद्ध होने पर यात्रियों को घंटों इंतजार और पैदल ही भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सड़क चौड़ी करने के नाम पर पर्यावरण को पहुंचाई जा रही क्षति ने भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ा दिया है। पहाड़ों में फोर लेन हाईवे के बजाय सरकार को जरूरी स्थानों पर ही 10 से 12 मीटर चौड़ी सड़क बनानी चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक गांवों को जोड़ने और आपात स्थित से निपटने के लिए छोटे बाईपास मार्गों का निर्माण करना चाहिए। जल्द ही ऑल वेदर रोड जैसी विनाशकारी परियोजना को काबू नहीं किया गया तो पर्वतीय जिले भीषण आपदा का शिकार हो जाएंगे।
विज्ञापन
-सुरेश भाई, पर्यावरणविद्।
कोट----------
ऑल वेदर रोड निर्माण कार्य से हमने कई भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कर दिया है। हालांकि मानसून सीजन में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए हमने सभी कंपनियों को सुरक्षित तरीके से काम करने व राष्ट्रीय राजमार्गों को सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एनएच व बीआरओ को भी संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारी व मशीनें तैनात करने के आदेश दिए हैं।
-डॉ.आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
बॉक्स:
राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 63 भूस्खलन संभावित क्षेत्र
उत्तरकाशी। जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे पर कुल 63 भूस्खलन संभावित क्षेत्र चिह्नित किए हैं, जिसमें से सर्वाधिक 37 भूस्खलन क्षेत्र गंगोत्री हाईवे पर मौजूद हैं। इनमें से भी बंदरकोट, नालूपानी, ओंगी, भाटूकासौड, मल्ला, स्वारीगाड व हेलगूगाड को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। जबकि यमुनोत्री हाईवे पर मौजूद 21 भूस्खलन जोन में से दोबाटा, सिलाई बैंड, ओजरी डबरकोट व ओरछा बैंड को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। वहीं मोरी और पुरोला के मोटर मार्गों में भी पांच भूस्खलन संभावित क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।
विज्ञापन
जिले में ऑल वेदर रोड के तहत जगह-जगह चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए पहाड़ों को खोदा गया है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। आलम यह है कि यमुनोत्री हाईवे मई-जून माह में हल्की बारिश से ही खरादी तथा सिलक्यारा बैंड के पास चल रहे सड़क निर्माण कार्य के कारण दो बार अवरुद्ध हो चुका है। यात्रा मार्ग पर बाईपास रोड की व्यवस्था नहीं होने से मार्ग अवरुद्ध होने पर यात्रियों को घंटों इंतजार और पैदल ही भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
विज्ञापन
सड़क चौड़ी करने के नाम पर पर्यावरण को पहुंचाई जा रही क्षति ने भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ा दिया है। पहाड़ों में फोर लेन हाईवे के बजाय सरकार को जरूरी स्थानों पर ही 10 से 12 मीटर चौड़ी सड़क बनानी चाहिए। साथ ही अधिक से अधिक गांवों को जोड़ने और आपात स्थित से निपटने के लिए छोटे बाईपास मार्गों का निर्माण करना चाहिए। जल्द ही ऑल वेदर रोड जैसी विनाशकारी परियोजना को काबू नहीं किया गया तो पर्वतीय जिले भीषण आपदा का शिकार हो जाएंगे।
विज्ञापन
-सुरेश भाई, पर्यावरणविद्।
कोट----------
ऑल वेदर रोड निर्माण कार्य से हमने कई भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कर दिया है। हालांकि मानसून सीजन में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए हमने सभी कंपनियों को सुरक्षित तरीके से काम करने व राष्ट्रीय राजमार्गों को सुचारु रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एनएच व बीआरओ को भी संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मचारी व मशीनें तैनात करने के आदेश दिए हैं।
-डॉ.आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
बॉक्स:
राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 63 भूस्खलन संभावित क्षेत्र
उत्तरकाशी। जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे पर कुल 63 भूस्खलन संभावित क्षेत्र चिह्नित किए हैं, जिसमें से सर्वाधिक 37 भूस्खलन क्षेत्र गंगोत्री हाईवे पर मौजूद हैं। इनमें से भी बंदरकोट, नालूपानी, ओंगी, भाटूकासौड, मल्ला, स्वारीगाड व हेलगूगाड को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। जबकि यमुनोत्री हाईवे पर मौजूद 21 भूस्खलन जोन में से दोबाटा, सिलाई बैंड, ओजरी डबरकोट व ओरछा बैंड को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। वहीं मोरी और पुरोला के मोटर मार्गों में भी पांच भूस्खलन संभावित क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।