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ग्रामीणों को दी जल संरक्षण व संवर्द्धन की जानकारी
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उत्तरकाशी। पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते जल संकट को लेकर अमर उजाला की ओर से अपराजिता अभियान के तहत सिरोर गांव में गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को जल संरक्षण व संवर्द्धन की जानकारी दी गई। इस अवसर पर ग्रामीणों ने बीज बम अभियान से जुड़कर मिश्रित वन उगाने की भी शपथ ली।
भटवाड़ी ब्लॉक के सिरोर गांव में आयोजित कार्यक्रम में गांव की महिलाओं ने लगातार बढ़ रहे जल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि दशकों पहले गांव में सात प्राकृतिक जलस्रोत हुआ करते थे, जिनसे कृषि भूमि की सिंचाई के साथ ही घराट भी संचालित किया जाता था। लेकिन मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना की टनल बनने के बाद ये स्रोत लुप्त हो गए। इस समस्या पर हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) के सदस्यों ने चर्चा करते हुए ग्रामीणों को जल संरक्षण व संवर्द्धन के कुछ सुझाव दिए। संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि गांव के बरसाती नालों में चैक डैम बनाए जाने चाहिए। साथ ही वर्षा जल संरक्षण के लिए प्रत्येक घर एवं गांव में सामूहिक टैंक का निर्माण कर पानी का संग्रहण करने की जरूरत है। उन्होंने खेतों की सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन के साथ ही रीवर लिफ्ट तकनीक अपनाने का भी सुझाव दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीणों ने गोष्ठी में मिली जानकारियों को धरातल में उतारने के साथ ही बीज बम अभियान से जुड़ने की भी शपथ ली। इस मौके पर राजवंती देवी, बबीता देवी, रमा राणा, बीना देवी, चतरा देवी, कृत्तेश्वरी देवी, अनीता देवी, विनीता देवी, ललीता देवी, विजयलक्ष्मी, सावित्री देवी, सीता देवी, माहेश्वरी देवी, विमला देवी, कविता देवी, एकादशी भट्ट, पार्वती देवी, सुनीता गुसांई, राखी राणा, गंगा बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
बीते कुछ सालों से जल संकट एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिससे निपटने के लिए सरकार को जमीनी स्तर की योजनाएं तैयार करनी चाहिए। साथ ही पेयजल व खेतों की सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों का भी प्रयोग करना चाहिए।
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मंजू देवी, ग्रामीण सिरोर गांव।
जल संकट से निपटने के लिए गांवों के पारंपरिक विज्ञान को जीवित किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार को प्रत्येक गांव में ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संरक्षण, चैक डैम आदि योजनाओं का भी निर्माण करना चाहिए।
सरला देवी, ग्रामीण सिरोर गांव।
भटवाड़ी ब्लॉक के सिरोर गांव में आयोजित कार्यक्रम में गांव की महिलाओं ने लगातार बढ़ रहे जल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि दशकों पहले गांव में सात प्राकृतिक जलस्रोत हुआ करते थे, जिनसे कृषि भूमि की सिंचाई के साथ ही घराट भी संचालित किया जाता था। लेकिन मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना की टनल बनने के बाद ये स्रोत लुप्त हो गए। इस समस्या पर हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) के सदस्यों ने चर्चा करते हुए ग्रामीणों को जल संरक्षण व संवर्द्धन के कुछ सुझाव दिए। संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि गांव के बरसाती नालों में चैक डैम बनाए जाने चाहिए। साथ ही वर्षा जल संरक्षण के लिए प्रत्येक घर एवं गांव में सामूहिक टैंक का निर्माण कर पानी का संग्रहण करने की जरूरत है। उन्होंने खेतों की सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन के साथ ही रीवर लिफ्ट तकनीक अपनाने का भी सुझाव दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीणों ने गोष्ठी में मिली जानकारियों को धरातल में उतारने के साथ ही बीज बम अभियान से जुड़ने की भी शपथ ली। इस मौके पर राजवंती देवी, बबीता देवी, रमा राणा, बीना देवी, चतरा देवी, कृत्तेश्वरी देवी, अनीता देवी, विनीता देवी, ललीता देवी, विजयलक्ष्मी, सावित्री देवी, सीता देवी, माहेश्वरी देवी, विमला देवी, कविता देवी, एकादशी भट्ट, पार्वती देवी, सुनीता गुसांई, राखी राणा, गंगा बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
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बीते कुछ सालों से जल संकट एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिससे निपटने के लिए सरकार को जमीनी स्तर की योजनाएं तैयार करनी चाहिए। साथ ही पेयजल व खेतों की सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों का भी प्रयोग करना चाहिए।
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मंजू देवी, ग्रामीण सिरोर गांव।
जल संकट से निपटने के लिए गांवों के पारंपरिक विज्ञान को जीवित किया जाना चाहिए। साथ ही सरकार को प्रत्येक गांव में ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संरक्षण, चैक डैम आदि योजनाओं का भी निर्माण करना चाहिए।
सरला देवी, ग्रामीण सिरोर गांव।