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पेंटिंग में उकेरा महिलाओं का दर्द

Thu, 17 Jan 2019 09:26 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jan 2019 09:26 PM IST
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पेंटिंग में उकेरा महिलाओं का दर्द
उत्तरकाशी। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत बृहस्पतिवार को मातली स्थित अजीम प्रेमजी फाउंडेशन स्कूल में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ‘महिलाओं की समस्याएं एवं उसके समाधान’ विषय पर बनाई गई पेंटिंग में महिलाओं के दर्द को उकेरा।
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बृहस्पतिवार को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के मुद्दे के प्रति जागरूकता फैलाई। महिलाओं की समस्याएं एवं उसके समाधान विषय पर बनाए गए चित्रों में छात्रों ने पानी व चारापत्ती के लिए महिलाओं द्वारा रोजाना किए जा रहे संघर्ष को दर्शाया। वहीं कुछ बच्चों ने घरेलू हिंसा व बालिका शोषण से निपटने के लिए 1098 व महिला हेल्प लाइन जैसे माध्यमों को सशक्त करने का सुझाव भी दिए।
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जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने बच्चों को बीज बम अभियान की जानकारी दी। ठांडी पर्यटन समिति के गजेंद्र राणा ने पर्वतीय क्षेत्र में मौजूद विभिन्न संभावनाओं को लेकर चर्चा की। प्रधानाचार्य सौरभ सोम ने कहा कि अगर पुरुष परिवार की ताकत है, तो महिलाएं उसकी रीढ़ हैं। इस मौके पर साहिल, राहुल राणा, राजुली शाह, आयुष, करिश्मा, कुलदीप, कुशल पाल, नितिन, प्रियांशी, सचिन, अलीशा, संजय, संतोषी सेमवाल आदि मौजूद रहे।
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महिलाओं को घास व चारापत्ती लाने के लिए जंगलों में जाना पड़ता है। जहां पहाड़ी से गिरने व जंगली जानवरों के हमले में कई महिलाएं घायल हो जाती हैं और कईयों की मौत हो जाती है। ऐसे में अगर गांव के निकट ही चारापत्ती का वनीकरण किया जाए, तो महिलाओं का समय व जीवन बचाया जा सकता है।
अर्जुन नाथ, छात्र।

आज भी बालिकाओं व महिलाओं से घर का सारा काम कराया जाता है, जिससे उनके पास जीवन में कुछ खुशनुमा पल बिताने का समय तक नहीं बचता है। ऐसे में अगर पुरुष घर के दैनिक कार्यों में सहयोग करें, तो महिलाओं को अपने सपने साकार करने का समय मिल सकता है।

अभिषेक नौटियाल, छात्र।

रोजमर्रा के जीवन में आज भी बालिकाओं के साथ भेदभाव किया जाता है, जबकि बेटे की चाह में भी महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे में महिलाओं को संगठित होकर अपने हक के लिए लड़ना चाहिए। साथ ही आस पड़ोस की महिलाओं को भी जागरूक करना चाहिए।
सुमन राणा, छात्रा।
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