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अपराजिता के मंच पर ग्रामीण महिलाओं ने रखी खेतीबाड़ी की समस्याएं
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उत्तरकाशी। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के अंतर्गत डुुंडा ब्लॉक के बड़ेथी गांव में गोष्ठी का आयोजन किया गया। हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी व रेणुका समिति के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में स्वरोजगार व उद्यमिता विकास पर चर्चा हुई, जिसमें महिलाओं ने प्रशासन से कृषि बागवानी का तकनीकी ज्ञान मुहैया कराने सहित स्थानीय उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था कराने की मांग की।
गोष्ठी में महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में सरसों, उड़द व तोर की अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन बीते कुछ सालों से कीड़े लगने व मिट्टी की उर्वरकता घटने से यह सभी फसलें बर्बाद होने लगी है। ऐसे में कृषि विभाग को समस्या की पड़ताल कर ग्रामीणों को आधुनिक तकनीक की जानकारी देनी चाहिए। रेणुका समिति के संदीप उनियाल ने बताया कि अगर स्थानीय उत्पादों से बनी न्यूट्रीला बाजार में बेची जाए, तो महिलाएं अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए संस्था द्वारा महिलाओं को मशीन व विपणन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि महिलाएं अपना समूह बनाकर शादी, पार्टी आदि में केटरिंग की बुकिंग ले सकती हैं। साथ ही यात्रा सीजन के दौरान हाईवे किनारे गढ़ भोज का स्टॉल लगाकर भी कमाई की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने व पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बीज बम अभियान से जुड़ने की शपथ ली। इस मौके पर एकादशी देवी, किरन देवी, कमली देवी, विमला देवी, ऊषा देवी, रामचंद्री देवी, सुचिता देवी, सुभागा देवी, कविता शाह, ममता देवी, पूर्णी देवी, जमना देवी, शकुंतला देवी, बबीता देवी, पिंकी देवी, हिमानी देवी, राधे उनियाल आदि मौजूद रहे।
विपणन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण फसलों आदि के अच्छे उत्पादन के बावजूद काश्तकारों को लाभ नहीं मिल रहा है। अगर किसानों की आय बढ़ानी है, तो शासन-प्रशासन को स्थानीय उत्पादों के लिए अलग से मंडी का निर्माण कर मूल्य निर्धारित करना चाहिए।
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मातेश्वरी देवी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार को प्रत्येक गांव की क्षमता व जरूरत के हिसाब से स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करने चाहिए। साथ ही महिलाओं के समूह को नियमित प्रशिक्षण व जरूरी संसाधन देकर, तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
शारदा देवी।
बड़ेथी क्षेत्र में अमरूद सहित दाल व सब्जियों की अच्छी पैदावार होती है। अगर संबंधित विभाग व प्रशासन क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाकर विपणन की व्यवस्था करे, तो महिलाएं अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं।
विमलेश्वरी देवी।
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गोष्ठी में महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में सरसों, उड़द व तोर की अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन बीते कुछ सालों से कीड़े लगने व मिट्टी की उर्वरकता घटने से यह सभी फसलें बर्बाद होने लगी है। ऐसे में कृषि विभाग को समस्या की पड़ताल कर ग्रामीणों को आधुनिक तकनीक की जानकारी देनी चाहिए। रेणुका समिति के संदीप उनियाल ने बताया कि अगर स्थानीय उत्पादों से बनी न्यूट्रीला बाजार में बेची जाए, तो महिलाएं अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं। इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए संस्था द्वारा महिलाओं को मशीन व विपणन की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने कहा कि महिलाएं अपना समूह बनाकर शादी, पार्टी आदि में केटरिंग की बुकिंग ले सकती हैं। साथ ही यात्रा सीजन के दौरान हाईवे किनारे गढ़ भोज का स्टॉल लगाकर भी कमाई की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने व पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बीज बम अभियान से जुड़ने की शपथ ली। इस मौके पर एकादशी देवी, किरन देवी, कमली देवी, विमला देवी, ऊषा देवी, रामचंद्री देवी, सुचिता देवी, सुभागा देवी, कविता शाह, ममता देवी, पूर्णी देवी, जमना देवी, शकुंतला देवी, बबीता देवी, पिंकी देवी, हिमानी देवी, राधे उनियाल आदि मौजूद रहे।
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विपणन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण फसलों आदि के अच्छे उत्पादन के बावजूद काश्तकारों को लाभ नहीं मिल रहा है। अगर किसानों की आय बढ़ानी है, तो शासन-प्रशासन को स्थानीय उत्पादों के लिए अलग से मंडी का निर्माण कर मूल्य निर्धारित करना चाहिए।
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मातेश्वरी देवी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार को प्रत्येक गांव की क्षमता व जरूरत के हिसाब से स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करने चाहिए। साथ ही महिलाओं के समूह को नियमित प्रशिक्षण व जरूरी संसाधन देकर, तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
शारदा देवी।
बड़ेथी क्षेत्र में अमरूद सहित दाल व सब्जियों की अच्छी पैदावार होती है। अगर संबंधित विभाग व प्रशासन क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाकर विपणन की व्यवस्था करे, तो महिलाएं अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं।
विमलेश्वरी देवी।