{"_id":"5bba31d4867a550d14519060","slug":"15389290855-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनेरी भाली पर भारी पड़ रही टिहरी झील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनेरी भाली पर भारी पड़ रही टिहरी झील
Updated Sun, 07 Oct 2018 09:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। टिहरी बांध झील को 830 मीटर तक भरे जाने का विपरीत असर मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। परियोजना के धरासू विद्युत गृह की टेल रेस चैनल (टीआरसी) से आगे तक झील का विस्तार होने के कारण बैक प्रेशर से टरबाइनों में तकनीकी दिक्कत और गंगा भागीरथी में बहकर आ रही सिल्ट से टीआरसी गेट चोक होने का खतरा बढ़ गया है।
वर्ष 2008 में करीब 2300 करोड़ से बनकर तैयार हुई जल विद्युत निगम की 304 मेगावाट क्षमता की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना सालाना 1200 से 1300 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर रही है। निर्माण के समय टीआरसी की डिजाइन में हुई चूक के कारण परियोजना क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही थी। तब वर्ष 2016 में टीआरसी की डिजाइन में सुधार के बाद इस साल 306 मेगावाट तक रिकार्ड उत्पादन दर्ज किया गया।
अब टिहरी बांध झील को 830 मीटर लेबल तक भरे जाने से एक बार फिर धरासू विद्युतगृह में उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। लेबल बढ़ने से झील का विस्तार टीआरसी से आगे तक हो गया है। टीआरसी से 821 मीटर लेबल से पानी बाहर निकल रहा है ओर आगे झील का लेबल 830 मीटर होने से यहां बैक प्रेशर बढ़ गया है, जिससे टरबाइनों की ग्लेंड सील कटने, गाइड वियरिंग पैड का तापमान बढ़ने और वाइब्रेशन से मशीनें गरम होने का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
टीआरसी से पानी के आउटलेट का लेबल 821 मीटर और टिहरी बांध झील का लेबल 830 मीटर होने से बैक प्रेशर का खतरा तो है, लेकिन 15 सितंबर के बाद ही झील का जलस्तर 825 मीटर से अधिक बढ़ाया जाना है। इस दौरान गंगा भागीरथी में पानी कम होने के कारण सिल्ट की समस्या नहीं रहती, जिससे परियोजना पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
बृजभूषण सिंह, उप महाप्रबंधक धरासू विद्युतगृह।
विज्ञापन
वर्ष 2008 में करीब 2300 करोड़ से बनकर तैयार हुई जल विद्युत निगम की 304 मेगावाट क्षमता की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना सालाना 1200 से 1300 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर रही है। निर्माण के समय टीआरसी की डिजाइन में हुई चूक के कारण परियोजना क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही थी। तब वर्ष 2016 में टीआरसी की डिजाइन में सुधार के बाद इस साल 306 मेगावाट तक रिकार्ड उत्पादन दर्ज किया गया।
विज्ञापन
अब टिहरी बांध झील को 830 मीटर लेबल तक भरे जाने से एक बार फिर धरासू विद्युतगृह में उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। लेबल बढ़ने से झील का विस्तार टीआरसी से आगे तक हो गया है। टीआरसी से 821 मीटर लेबल से पानी बाहर निकल रहा है ओर आगे झील का लेबल 830 मीटर होने से यहां बैक प्रेशर बढ़ गया है, जिससे टरबाइनों की ग्लेंड सील कटने, गाइड वियरिंग पैड का तापमान बढ़ने और वाइब्रेशन से मशीनें गरम होने का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन
टीआरसी से पानी के आउटलेट का लेबल 821 मीटर और टिहरी बांध झील का लेबल 830 मीटर होने से बैक प्रेशर का खतरा तो है, लेकिन 15 सितंबर के बाद ही झील का जलस्तर 825 मीटर से अधिक बढ़ाया जाना है। इस दौरान गंगा भागीरथी में पानी कम होने के कारण सिल्ट की समस्या नहीं रहती, जिससे परियोजना पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
बृजभूषण सिंह, उप महाप्रबंधक धरासू विद्युतगृह।