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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए विभागों और कृषि विज्ञान केंद्र में समन्वय की जरूरत
Updated Sun, 07 Oct 2018 09:12 PM IST
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चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इस अवसर पर ‘विवेकानंद प्रश्नोत्तरी’ एवं ‘पर्वतीय क्षेत्रों में आलू की वैज्ञानिक खेती’ पुस्तकों का विमोचन किया गया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र की वार्षिक समीक्षा के मौके पर शनिवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने की। उन्होंने कहा कि किसान अपनी समस्याओं का हल केंद्र के विशेषज्ञों से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने भूमि एवं जल संरक्षण तकनीकों तथा मृदा उर्वरा प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
डा. गौरव पपनै ने किसानों को नई सूचना तकनीक से जोड़ने के लिए केवीके संदेश एप के बारे में बताया। इस मौके पर प्रभारी डा. पंकज नौटियाल, वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के डा. एसके गुप्ता, नाबार्ड के जीएस चौधरी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ, मुख्य उद्यान अधिकारी बृजराज सिंह, बीडीओ सोहन सिंह राणा, सहायक निदेशक मत्स्य प्रमोद शुक्ल, कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी के प्रभारी अधिकारी डा.आलोक येवले आदि मौजूद थे।
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ये हैं कृषि विज्ञान केंद्र के लक्ष्य
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2017-18 में कुल 65 प्रशिक्षण आयोजित कर 1672 किसानों को प्रशिक्षित किया। 44.5 हेक्टेयर जमीन पर विभिन्न फसलों के 750 प्रदर्शन व सात अनुकरणीय परीक्षण किए। 1099 प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से जिले में 14 हजार 690 किसानों को लाभान्वित किया गया। साथ ही केंद्र में 29.80 क्विंटल उन्नत बीज और 96 हजार 925 सब्जी पौध तैयार की गई। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 123 प्रशिक्षण, 52 हेक्टेयर पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, 7 अनुकरणीय परीक्षण, 262 प्रसार कार्यक्रम, 48.6 क्विंटल बीज उत्पादन व 1,50,000 पौध उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र की वार्षिक समीक्षा के मौके पर शनिवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने की। उन्होंने कहा कि किसान अपनी समस्याओं का हल केंद्र के विशेषज्ञों से प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने भूमि एवं जल संरक्षण तकनीकों तथा मृदा उर्वरा प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
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डा. गौरव पपनै ने किसानों को नई सूचना तकनीक से जोड़ने के लिए केवीके संदेश एप के बारे में बताया। इस मौके पर प्रभारी डा. पंकज नौटियाल, वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के डा. एसके गुप्ता, नाबार्ड के जीएस चौधरी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ, मुख्य उद्यान अधिकारी बृजराज सिंह, बीडीओ सोहन सिंह राणा, सहायक निदेशक मत्स्य प्रमोद शुक्ल, कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी के प्रभारी अधिकारी डा.आलोक येवले आदि मौजूद थे।
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ये हैं कृषि विज्ञान केंद्र के लक्ष्य
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2017-18 में कुल 65 प्रशिक्षण आयोजित कर 1672 किसानों को प्रशिक्षित किया। 44.5 हेक्टेयर जमीन पर विभिन्न फसलों के 750 प्रदर्शन व सात अनुकरणीय परीक्षण किए। 1099 प्रसार कार्यक्रमों के माध्यम से जिले में 14 हजार 690 किसानों को लाभान्वित किया गया। साथ ही केंद्र में 29.80 क्विंटल उन्नत बीज और 96 हजार 925 सब्जी पौध तैयार की गई। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 123 प्रशिक्षण, 52 हेक्टेयर पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, 7 अनुकरणीय परीक्षण, 262 प्रसार कार्यक्रम, 48.6 क्विंटल बीज उत्पादन व 1,50,000 पौध उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।