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एक कमरे में चल रहा हाई स्कूल तुल्याडा, छह साल से नहीं बना भवन
Updated Thu, 12 Apr 2018 10:56 PM IST
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चिन्यालीसौड़। सरकारी तंत्र की खामियों के चलते तुल्याडा हाईस्कूल का भवन बीते छह साल बाद भी नहीं बन पाया है, जिससे छात्र एवं शिक्षक एक कमरे में बैठकर पठन-पाठन को मजबूर हैं।
वर्ष 2012 में रमसा के तहत तुल्याडा हाईस्कूल के भवन निर्माण के लिए शासन की ओर से 34.71 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 9 माह का समय दिया गया था, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी भवन का निर्माण नहीं हो सका। प्रधान नत्थीलाल नौटियाल, प्रेम सिंह पंवार ने बताया कि कुछ समय पहले विद्यालय की छात्र संख्या 24 से 25 थी, लेकिन भवन आदि बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को दूसरे विद्यालयों में दाखिला दिला रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में अब महज 11 छात्र रह गए हैं।
कोट:
पूर्व में चयनित स्थान पर विवादों के चलते भवन निर्माण के लिए नया स्थान चुनकर साइट डेवलपमेंट किया गया था। इसमें साढ़े दस लाख रुपये खर्च हो गए थे। इसके बाद विभाग ने रमसा परियोजना को वर्ष 2016 में 63.11 लाख रुपये का रिवाइज एस्टिमेट भेजा था, लेकिन पैसा नहीं मिलने पर भवन निर्माण का कार्य रुका हुआ है।
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गोविंद कुमार, एई, सिंचाई विभाग।
कोट:
धनराशि आवंटन को लेकर अंतिम कार्रवाई राज्य परियोजना कार्यालय देहरादून से होनी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
यशपाल भंडारी, जिला समन्वयक, रमसा।
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वर्ष 2012 में रमसा के तहत तुल्याडा हाईस्कूल के भवन निर्माण के लिए शासन की ओर से 34.71 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 9 माह का समय दिया गया था, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी भवन का निर्माण नहीं हो सका। प्रधान नत्थीलाल नौटियाल, प्रेम सिंह पंवार ने बताया कि कुछ समय पहले विद्यालय की छात्र संख्या 24 से 25 थी, लेकिन भवन आदि बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को दूसरे विद्यालयों में दाखिला दिला रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में अब महज 11 छात्र रह गए हैं।
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कोट:
पूर्व में चयनित स्थान पर विवादों के चलते भवन निर्माण के लिए नया स्थान चुनकर साइट डेवलपमेंट किया गया था। इसमें साढ़े दस लाख रुपये खर्च हो गए थे। इसके बाद विभाग ने रमसा परियोजना को वर्ष 2016 में 63.11 लाख रुपये का रिवाइज एस्टिमेट भेजा था, लेकिन पैसा नहीं मिलने पर भवन निर्माण का कार्य रुका हुआ है।
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गोविंद कुमार, एई, सिंचाई विभाग।
कोट:
धनराशि आवंटन को लेकर अंतिम कार्रवाई राज्य परियोजना कार्यालय देहरादून से होनी है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
यशपाल भंडारी, जिला समन्वयक, रमसा।