{"_id":"5a26d8174f1c1bd9798c0e73","slug":"151249525817-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदारताल क्षेत्र से मृत भरल के अवशेष लेकर लौटी जांच टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारताल क्षेत्र से मृत भरल के अवशेष लेकर लौटी जांच टीम
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क के केदारताल क्षेत्र में भरल मृगों में अज्ञात बीमारी की सूचना पर क्षेत्र में गई टीम लौट आई है। टीम को क्षेत्र में कोई बीमार भरल तो नहीं मिला, लेकिन मौके पर मृत मिले भरल के शव को टीम ने उत्तरकाशी पहुंचा दिया है। पार्क प्रशासन ने शव के नमूने जांच के लिए इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट को भेज दिए हैं।
बता दें कि कुछ समय पहले एक पर्वतारोही दल केदारताल क्षेत्र में गया था। वहां उन्हें कुछ बीमार भरल मृग दिखायी दिए थे, जिन्हें आंखों में कोई बीमारी थी। ये पर्वतारोही वहां से अपने साथ एक बीमार भरल के बच्चे को लेकर आए थे। जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इसकी जांच में फेफड़ों में वायरस की बात सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने बीते 2 दिसंबर को 15 सदस्यीय जांच दल मौके पर भेजा था। यह टीम मंगलवार को उत्तरकाशी लौट आई है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक श्रवण कुमार ने बताया कि जांच टीम को केदार खर्क क्षेत्र में भरल मृगों के झुंड तो दिखायी दिए, लेकिन कोई बीमार भरल नहीं मिला। टीम को वहां एक मृत भरल के अवशेष जरूर मिले। जिन्हें लेकर यह टीम लौट आई है। अब इसके नमूने इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली भेजे जा रहे हैं। भरल मृगों में किसी संक्रामक बीमारी की पुष्टि होने पर आगे विशेषज्ञों की मदद से कार्रवाई की जाएगी। टीम में फॉरेस्टर भागचंद, राकेश राणा, विनोद गुसाई, एक फॉरेस्ट गार्ड, वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की रिसर्च टीम के दो सदस्य एवं नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के दो प्रशिक्षक तथा नौ पोर्टर शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि कुछ समय पहले एक पर्वतारोही दल केदारताल क्षेत्र में गया था। वहां उन्हें कुछ बीमार भरल मृग दिखायी दिए थे, जिन्हें आंखों में कोई बीमारी थी। ये पर्वतारोही वहां से अपने साथ एक बीमार भरल के बच्चे को लेकर आए थे। जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इसकी जांच में फेफड़ों में वायरस की बात सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने बीते 2 दिसंबर को 15 सदस्यीय जांच दल मौके पर भेजा था। यह टीम मंगलवार को उत्तरकाशी लौट आई है।
विज्ञापन
गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक श्रवण कुमार ने बताया कि जांच टीम को केदार खर्क क्षेत्र में भरल मृगों के झुंड तो दिखायी दिए, लेकिन कोई बीमार भरल नहीं मिला। टीम को वहां एक मृत भरल के अवशेष जरूर मिले। जिन्हें लेकर यह टीम लौट आई है। अब इसके नमूने इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली भेजे जा रहे हैं। भरल मृगों में किसी संक्रामक बीमारी की पुष्टि होने पर आगे विशेषज्ञों की मदद से कार्रवाई की जाएगी। टीम में फॉरेस्टर भागचंद, राकेश राणा, विनोद गुसाई, एक फॉरेस्ट गार्ड, वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की रिसर्च टीम के दो सदस्य एवं नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के दो प्रशिक्षक तथा नौ पोर्टर शामिल थे।
विज्ञापन