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मानसून की दस्तक को देखकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे ग्रामीण
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:19 PM IST
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उत्तरकाशी। भूधंसाव को लेकर अत्यधिक संवेदनशील गांव की श्रेणी में शामिल यमुनोत्री तथा गंगोत्री हाईवे से लगे गांव के लोग पलायन कर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे हैं। बीते बरसात में 62 गांव में से 26 अत्यधिक संवेदनशील की सूची में शामिल किए गए थे, लेकिन इनके पुनर्वास का मामला अभी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण व सरकार से पत्राचार के स्तर पर ही लटका हुआ है।
पराशर ऋषि की तप स्थली और तप्तकुंडों के कारण पर्यटक स्थल बने गंगनानी वाला हुर्री गांव नीचे भागीरथी के कटाव तथा ऊपर की ओर भूधंसाव की चपेट में हैं। गांव के कृपाल सिंह, नत्थी सिंह ने गांव की कुछ दूरी गोशाला बना कर वहीं परिवार शिफ्ट कर दिया। पूर्व प्रधान बिहारी लाल समेत श्रीचंद, वीरेंद्र, रविंद्र आदि दस लोगों के घरों में दरारे गहराने से वे भी गांव छोड़ने की तैयारी कर रहे। प्रधान राखी बताती है कि इस स्थिति को वे प्रशासन तथा क्षेत्रीय विधायक के समक्ष रख चुके है। भटवाड़ी गांव भी भागीरथी के कटाव व ऊपर से धंसाव से बेहाल है। यहां 2010 से भूस्खलन सक्रीय है, किंतु भूवैज्ञानिक के सर्वेक्षण के बाद भी अभी तक कई परिवार जल विद्युत निगम कालोनी में शराणार्थियों की तरह जीवन यापन कर रहे। यहां 255 आवासीय भवन तथा चड़ेती भटवाड़ी में करीब 60 कारोबारी ठिकाने भूधंसाव की जद में है। गांव के राघवानंद नौटियाल तथा बृजपाल राणा बताते है कि बरसात के बाद अब धूप पड़ने से जमीन धंसने की प्रक्रिया तेज होती है। यही स्थिति यमुनोत्री हाईवे से लगे बाडिया गांव की भी है। 95 परिवार के इस गांव में हर बरसात में मकानों तथा खेती की जमीन में दरारे गहराने तथा जलस्रोत फूटने के कारण तबाही से ग्रामीण आशंकित है। गांव के जय सिंह बताते है कि इस स्थिति को देखकर ग्रामीण चार किमी दूर गोशालाओं में रहने को मजबूर हैं।
कोट.....
अभी भटवाड़ी तथा अस्तल गुनालगांव के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। 26 में से 9 अत्यधिक संवेदनशील गांव में भूगर्भीय सर्वेक्षण कार्य पूरा हो गया है।
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देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।
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पराशर ऋषि की तप स्थली और तप्तकुंडों के कारण पर्यटक स्थल बने गंगनानी वाला हुर्री गांव नीचे भागीरथी के कटाव तथा ऊपर की ओर भूधंसाव की चपेट में हैं। गांव के कृपाल सिंह, नत्थी सिंह ने गांव की कुछ दूरी गोशाला बना कर वहीं परिवार शिफ्ट कर दिया। पूर्व प्रधान बिहारी लाल समेत श्रीचंद, वीरेंद्र, रविंद्र आदि दस लोगों के घरों में दरारे गहराने से वे भी गांव छोड़ने की तैयारी कर रहे। प्रधान राखी बताती है कि इस स्थिति को वे प्रशासन तथा क्षेत्रीय विधायक के समक्ष रख चुके है। भटवाड़ी गांव भी भागीरथी के कटाव व ऊपर से धंसाव से बेहाल है। यहां 2010 से भूस्खलन सक्रीय है, किंतु भूवैज्ञानिक के सर्वेक्षण के बाद भी अभी तक कई परिवार जल विद्युत निगम कालोनी में शराणार्थियों की तरह जीवन यापन कर रहे। यहां 255 आवासीय भवन तथा चड़ेती भटवाड़ी में करीब 60 कारोबारी ठिकाने भूधंसाव की जद में है। गांव के राघवानंद नौटियाल तथा बृजपाल राणा बताते है कि बरसात के बाद अब धूप पड़ने से जमीन धंसने की प्रक्रिया तेज होती है। यही स्थिति यमुनोत्री हाईवे से लगे बाडिया गांव की भी है। 95 परिवार के इस गांव में हर बरसात में मकानों तथा खेती की जमीन में दरारे गहराने तथा जलस्रोत फूटने के कारण तबाही से ग्रामीण आशंकित है। गांव के जय सिंह बताते है कि इस स्थिति को देखकर ग्रामीण चार किमी दूर गोशालाओं में रहने को मजबूर हैं।
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कोट.....
अभी भटवाड़ी तथा अस्तल गुनालगांव के विस्थापन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। 26 में से 9 अत्यधिक संवेदनशील गांव में भूगर्भीय सर्वेक्षण कार्य पूरा हो गया है।
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देवेंद्र पटवाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी।