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भगवान घर पहुंचा दे, दोबारा यहां नहीं आएंगे
उत्तरकाशी/रवींद्र थलवाल
Updated Thu, 20 Jun 2013 05:32 PM IST
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रविवार को तेज बारिश के बीच गंगोत्री से लौट रहे थे कि मल्ला के पास भूस्खलन होने लगा। कुछ देर वाहन रोका तो पूरा मार्ग मलबे में अट गया। चार दिन किसी तरह खुले आसमान के नीचे काटे। अब तो बस भगवान एक बार हमें घर पहुंचा दे तो दोबारा यहां आने की नहीं सोचेंगे। यहां असुविधाएं ऐसी कि जैसे शासन-प्रशासन है ही नहीं।
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गंगोत्री घाटी से 25 से 30 किमी पैदल दूरी तय कर उत्तरकाशी पहुंचे रतलाम मध्यप्रदेश के 120 तीर्थयात्रियों ने अपनी पीड़ा ऐसे ही बयां की। आपदा का भय ऐसा की शरीर सिहर उठता है। यात्री दल में शामिल रामचंद्र बताते हैं कि जीवन के छह दशक पार कर चुका हूं, लेकिन ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी।
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यकीन नहीं हो रहा था कि घर जा भी पाएंगे
इसी दल में शामिल रमेश सोलंकी कहते हैं कि भगवान एक बार हमें सकुशल घर पहुंचा दें तो दोबारा यहां आने की नहीं सोचेंगे।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
नलूणा में फंसे सांगानेर जयपुर के नंदकिशोर बताते हैं कि जब बारिश हो रही थी, तब हमें यकीन नहीं हो रहा था कि घर जा भी पाएंगे या नहीं। पास के गांव में 25 हजार रुपये में तीन कमरे लेकर किसी तरह भूखे-प्यासे चार दिन काटे।
डर गई छह साल की लीसा
मध्यप्रदेश के यात्री दल में छह वर्ष की लीसा भी अपने नाना वंशीलाल और नानी काबेरी के साथ गंगोत्री आ रखी थी। लीसा के नाना बताते हैं कि गंगा की उफनती जलधारा और मूसलाधार बारिश देखकर लीसा डर गई थी। वह मम्मी और पापा को याद करने लगी। किसी तरह उसे शांत कराया।
कहां गई स्वयंसेवी संस्थाएं
सरकारी आंकड़ों में जिले में कई स्वयंसेवी संस्थाएं काम रही हैं। हालांकि आपदा की इस घड़ी में कोई भी नहीं दिख रही है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
चार दिनों तक आद्य शंकराचार्य शिक्षण संस्थान में ठहरे अहमदाबाद गुजरात के हसित भट्ट कहते हैं कि गुजरात में ऐसी त्रासदी होती तो कई स्वयंसेवी संस्थाएं सामने आ जाती। यहां तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई स्वयंसेवी संस्थाएं नहीं है।
तीर्थयात्रियों को पिलाया जूस
होटल व्यवसायी आमोद पंवार भले ही खुद बाढ़ की मार झेल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे भूखे-प्यासे लौट रहे यात्रियों की मदद में जुटे हैं। बृहस्पतिवार को पंवार ने अपने होटल में काम करने वाले मनवीर, दीपक, सुदीप, सतेंद्र के सहयोग से उत्तरकाशी पहुंचे सैकड़ों यात्रियों को बस अड्डे पर जूस पिलाया।