फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   uttarakhand guest teacher new political issue

उत्तराखंड में अब इस मुद्दे पर है राजनीतिक दलों की नजर

Wed, 20 Apr 2016 01:01 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 20 Apr 2016 01:01 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand guest teacher new political issue
अतिथि शिक्षकों से मिले हरीश रावत - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड में राजनीतिक दलों के बीच अतिथि शिक्षकों को लेकर जंग छिड़ी हुई है। सभी दल खुद को इनका सबसे बड़ा हितैषी बता रहे हैं और इनके मसले पर सड़क पर उतर आए हैं, लेकिन जर्जर हाल स्कूलों और बच्चों की किसी को सुध नहीं है।

विज्ञापन


शिक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद बच्चों के पास न किताबें हैं न ही स्कूलों में शिक्षक हैं। 2500 से अधिक गंभीर बीमार नियमित शिक्षकों की भी कोई सुध लेने वाला नहीं हैं। नया शिक्षा सत्र 2016-17 शुरू हुए 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों के 11937 पद रिक्त हैं।
विज्ञापन


स्कूलों में न शिक्षक हैं न ही बच्चों को सरकार की ओर से मिलने वाली निशुल्क पाठ्य पुस्तकें मिल पाई हैं। वही, निशंक सरकार में वर्ष 2011 में उच्चीकृत हुए 89 स्कूलों को इस शिक्षा सत्र में भी शिक्षक नहीं मिल पाए हैं। जबकि गंभीर बीमार और वर्षों से पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में कार्यरत 2500 शिक्षकों के तबादलों के मामले में भी सभी दल बड़े आश्चर्यजनक तरीके से चुप्पी साधे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले शिक्षा सत्र में इन शिक्षकों के 29 (1) के तहत तबादला सूची जारी होनी थी, जो अब तक नहीं हो पाई है। इन दलों को न इन शिक्षकों की चिंता है न ही प्रदेशभर में 700 से अधिक जर्जर हाल स्कूलों में पढ़ रहे हजारों नौनिहालों की। सैकड़ों स्कूलों में पेयजल और बिजली की समस्या भी जस की तस बनी है।

लेकिन राजनीतिक दलों के बीच जिस तरीके से अतिथि शिक्षकों के मसले पर श्रेय लेने की होड़ मची है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई राजनीतिक दल शिक्षा में सुधार को लेकर चिंतित हैं या फिर केवल अपना राजनीतिक हित साध रहे हैं।

काश इनके बीच भी जाते राजनीतिक दल

uttarakhand guest teacher new political issue
अतिथि शिक्षकों का अनशन - फोटो : AmarUjala

सैकड़ों एसएसए के शिक्षकों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। पहाड़ में वर्षों की सेवा के बावजूद शिक्षक सुगम में नहीं आ पाए हैं।

910 शिक्षा आचार्यों का शिक्षा मित्र में समायोजन नहीं हो पाया है, सैकड़ों स्कूलों में बिजली और पेयजल की समस्या दूर नहीं हो पाई है, बच्चों को पाठ्य पुस्तकें समय पर नहीं मिल पाई हैं। शिक्षकों के समय पर प्रमोशन नहीं हो पा रहे हैं, 700 से अधिक इंटर कालेजों में प्रिंसिपल नहीं हैं, स्कूलों में बच्चों के लिए फर्नीचर भी नहीं है।

हमें विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिला, यही वजह है कि शासन ने हमारी कुछ मांगें मान ली हैं। अन्य मांगों पर भी जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिला है। 
- शांति स्वरूप सिंह, अध्यक्ष अतिथि शिक्षक संघ

राजनीतिक दलों को शिक्षा सुधार की चिंता नहीं है। दो साल से शिक्षकों के प्रमोशन लटके हैं, स्कूलों में तमाम समस्या बनी हैं, लेकिन केवल घटिया राजनीति हो रही है। 
- राम सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राजकीय शिक्षक संघ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed