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उत्तराखंडः आग से मिलेगी राहत, पहाड़ी इलाकों में बारिश शुरू

Tue, 03 May 2016 06:26 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 May 2016 06:26 PM IST
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बा‌रिश

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में धधक रहे जंगलों के बीच एक राहत भरी खबर है। कुमाऊं मंडल के मुक्तेश्वर और मुनस्यारी में मंगलवार दोपहर बाद बारिश शुरू हो गई। इसके साथ ही गढ़वाल के उत्तरकाशी जिले में भी बारिश शुरू हो गई है। इससे राज्य के जंगलों में लगी आग से राहत मिलने की संभावना है। मंगलवार को एमआई 17 ने नैनीताल और मुक्तेश्वर के जंगलों में पानी की बौछारें गिराई।

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उत्तराखंड के गढ़वाल में मंगलवार को भी कई क्षेत्रों के जंगल धधकते रहे। रुद्रप्रयाग जिले के कई क्षेत्रों में मंगलवार को भी जंगलों से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि और जखोली पूर्वी व पश्चिमी रेंज के जंगलों में अब भी आग भड़की हुई है। इस आग से वातावरण में छाई घनी धुंध के कारण सूरज की तपन तेज है, जिससे उमस भरी गर्मी पड़ रही है। ऋषिकेश और हरिद्वार में फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया।
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मंगलवार को दोपहर एक बजे तक अलकनंदा घाटी के चारों ओर लगी धुंध से एमआई 17 उड़ान नहीं भर पाया। बदरीनाथ वन प्रभाग के पाखी और टंगणी के मध्य जंगल में मंगलवार को भी आग धधकती रही। एक वन कर्मी, छह पुलिस कर्मी और एक
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पीएसी प्लाटून आग बुझाने में लगे हुए हैं। एक दमकल वाहन भी मौके पर है।

वहीं, एनडीआरएफ की टीमें भी पोखरी, दशोली और कर्णप्रयाग वन रेंजों में आग बुझाने में लगी हुई है। चमोली जनपद में सोमवार से बीएसएनएल की बेस और मोबाइल सेवा ठप पड़ी हुई है, जिससे बैंक व अन्य सरकारी विभागों में कार्य प्रभावित हो रहा है। जंगल की आग से बीएसएनएल की ओएफसी लाइन फुंक जाने से कनेक्टिवी ठप है।

मंगलवार को चकराता वन प्रभाव के मोल्‍टा रेंज और चातरा बीट में सुबह करीब सात बजे आग लगी, जिसे वन कर्मियों और ग्रामीणों द्वारा दो घंटे में आग पर काबू पाया गया। कनासर बीट में भी छुट-पुट आग लगने की घटनाएं सामने आई, जिन पर काबू पा लिया गया। आग की घटनाओं के मद्देनजर वन विभाग की टीम की गस्त जारी है। मसूरी और टिहरी के बीच पढ़ने वाले फाटाघाट सुवाखोली के पास आग लगने की एक घटना सामने आई, जिसे बुझा दिया गया।

वहीं जीबी पंत पर्यावरण विकास एवं शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने जंगलों की आग से प्रभावित जड़ी बूटियों को सूचीबद्ध कर लिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन जड़ी बूटियों को पुन: स्थापित होने में कई वर्ष लग सकते हैं। लैंटाना जैसी हानिकारक वनस्पतियों को आग से बढ़ावा मिलता है। राजाजी पार्क के उपनिदेशक ने बताया‌ कि हरिद्वार की राजाजी पार्क रेंज में आग पर काबू पा लिया गया है। वन विभाग की टीम लगातार गस्त कर रही है।

उधर, गढ़वाल मंडल में सोमवार को भी जंगल में आग लगने की 123 घटनाएं हुई। वन विभाग जंगल की आग बुझाने के लिए कितना संवेदनहीन है, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि चमोली जिले के रौली गांव और टिहरी जिले के ग्राम साणों के घमतपा नामे तोक में आग लगने की सूचना देने के बाद भी वहां कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने खुद के प्रयास से आग पर काबू पाया।

वहीं रुद्रप्रयाग जिले में जंगलों में लगी आग ने चार वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। अब तक 45 घटनाओं में 97.20 हेक्टेयर जंगल राख हो चुके हैं। उत्तरकाशी में सौ हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आए हैं। अब बस्तियों की तरफ बढ़ रही आग पर तो काबू पा लिया गया, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में अब भी आग सुलग रही है। विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं होना भी आड़े आ रहा है। इसके साथ ही कई जगह ट्रांसफार्मर जल गए हैं।

कितनी आग बुझी स्थिति नहीं है स्पष्ट

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आग की सबसे ज्यादा आशंका चीड़ के जंगलों में होती है। - फोटो : अमर उजाला

श्रीनगर में दो दिनों के अभियान के बाद जंगलों की कितनी आग बुझी यह स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धुंध को देखकर लग रहा है कि जंगलों में अब भी आग भड़क रही है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी आग बुझने को लेकर आश्वस्त नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में पानी की बौछार कितनी आग बुझी कह पाना मुश्किल है।

सोमवार को दावानल की 123 घटनाएं हुई
गढ़वाल में जंगलों में भड़की आग काबू होने का नाम नहीं ले रही है। मंडल में आग की चपेट में आने से रोज सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जल रहे हैं। मंडल में आग की चपेट में आने से 1413.58 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गए हैं। पौड़ी जिले में अमेली और सिविल के जंगलों में कई जगहों पर आग धधकी हुई है।

गढ़वाल मंडल में अब तक आग की 803 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें 1413.58 हेक्टेयर वन जलकर राख हो चुके हैं। वन विभाग के अनुसार मंडल में सोमवार को जंगल में आग की 123 घटनाएं हुई है। इसमें 217.05 हेक्टेयर वन आग की चपेट में आने से जले हैं।

इसमें गढ़वाल वृत्त में सर्वाधिक 108.03 हेक्टेयर, भागीरथी वृत्त में 65.05 हेक्टेयर, यमुना वृत्त में 32.35 हेक्टेयर, शिवालिक वृत्त में 11.35 हेक्टेयर वन क्षेत्र शामिल है। पौड़ी में खिर्सू  उल्ली, अमेली जंगल समेत कई जगहों में आग भड़की हुई है। डीएम चंद्रशेखर भट्ट ने बताया कि खिर्सू, उल्ली के जंगल में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। अमेली एवं सिविल जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। 

वन कर्मी नहीं पहुंचे, ग्रामीणों ने खुद बुझाई आग
गोपेश्वर में घिंघराण क्षेत्र के रौली गांव के जंगल में लगी आग से देर रात तक अफरा-तफरी रही। ग्रामीणों ने फोन पर वन विभाग के अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी कोई कर्मचारी आग बुझाने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने खुद ही कंटीली टहनियों और पानी की मदद से आग पर काबू पाया।

रविवार शाम छह बजे देवर गांव के समीप जंगल में आग भड़क गई। रात करीब दस बजे आग पहाड़ी के दूसरी ओर स्थित रौली गांव के शीर्ष भाग तक पहुंच गई। इससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। रौली के ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने चेन बनाकर पानी की बाल्टियों और कंटीली टहनियों से बमुश्किल आग पर काबू पाया।

आग से गोशाला राख, तीन मवेशियों की मौत

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नारायणबगड़ और कर्णप्रयाग के जंगलों में रविवार की रात लगी आग से वन संपदा सहित एक गोशाला और तीन मवेशी आग की भेंट चढ़ गए। नारायणबगड़ के निलाड़ी गांव के जंगलों में लगी आग से गांव के पृथ्वीराम की गोशाला जलकर राख हो गई। दावानल की चपेट में आने से उनकी एक दुधारू भैंस और दो बैलों की मौत हो गई।

वहीं जीआईसी नारायणबगड़ के ऊपर जंगल में लगी आग पर पीआरडी के जवानों ने काबू कर दिया। सोमवार को बीडीओ टीआर शर्मा ने जनप्रतिनिधियों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों और नागरिकों के साथ बैठक कर जंगलों की निगरानी रखने की अपील की। इस मौके पर डॉ. हरपाल सिंह नेगी, पीआरडी के ब्लॉक कंमाडंर रामानंद भट्ट आदि मौजूद थे। जबकि कर्णप्रयाग ब्लॉक के बणसोली, सुमल्टा के जंगलों में रविवार से लगी आग पर काबू नहीं पाया गया है।

वाट्सएप नं. पर दी सूचना, नहीं पहुंचे वनकर्मी
क्षेत्र पंचायत सदस्य महिपाल सिंह नेगी ने बताया कि वन विभाग की ओर से जारी किए गए वॉट्सएप नंबर पर मैसेज करने के बाद भी वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। इससे कई हेक्टेयर वन संपदा जलकर खाक हो गई। विभागीय कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई। 

आग की भेंट चढ़ीं बीएसएनएल की ओएफसी लाइन
चमोली जनपद में सोमवार को तेज हवा होने से जंगलों की आग और भी विकराल रूप धारण कर चुकी है। आग की चपेट में बीएसएनएल की ओएफसी लाइन भी आ गई है। इससे चमोली जनपद में बीएसएनएल की मोबाइल और बेस फोन सेवा ठप पड़ गई है। सोमवार को अपराह्न तीन बजे से बीएसएनएल की संचार सेवा ने काम करना बंद कर दिया है।

वहीं, चमोली, पीपलकोटी, जोशीमठ, निजमुला, नंदप्रयाग क्षेत्र के जंगल अभी भी आग से धधक रहे हैं। सोमवार को एनडीआरएफ की टीम ने चमोली बाजार के समीप चीड़ के जंगल में धधक रही आग पर काबू पाया। जंगल की आगे से जनपद के बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत 119.5 हेक्टेयर, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग में 162.25 हेक्टेयर, अलकनंदा भूमि संरक्षण के अधीन 18.60 हेक्टेयर और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क जोशीमठ में 8.00 हेक्टेयर वन भूमि की चपेट में आई।

दावानल से झुलस गया सौ हेक्टेयर जंगल
उत्तरकाशी के जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के वन विभाग के प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। सोमवार को भी जिले के जंगल धू-धूकर जलते रहे। हालांकि आबादी क्षेत्र तक पहुंची आग को काबू कर लिया गया है। अब तक जनपद में 102.5 हेक्टेयर जंगल दावानल से स्वाह हो चुका हैं।

झाड़ियों से बनी झाड़ू पटक कर आग बुझाने जैसे सीमित संसाधनों के सहारे वन कर्मी आग पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं गंगा घाटी के चिन्यालीसौड़, धरासू, डुंडा, मुखेम और वरुणावत के जंगलों में हो रही हैं। उत्तरकाशी वन प्रभाग के अंतर्गत अब तक 75.4 हेक्टेयर जंगल स्वाह हो चुका है। रवाईं घाटी के जंगल अभी अपेक्षाकृत शांत हैं। टौंस वन प्रभाग में 8.9 और अपर यमुना वन प्रभाग में 11.4 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आए हैं। तापमान में इजाफा होने के साथ ही वातावरण में छाई धुंध स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा करने लगी है।

इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जंगलों में आग लगने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। अब तक जिले में 102.5 हेक्टेयर जंगल आग से झुलस चुका है। फिलहाल आबादी क्षेत्र के आसपास पहुंची आग को काबू कर लिया गया है। विभाग की टीमें जंगलों में लगी आग पर काबू पाने में जुटी हैं।- बाबूलाल, एसडीओ उत्तरकाशी वन प्रभाग।

दोबारा भड़ी आग, चारों ओर धुएं का गुबार

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आग की घटनाओं के बढ़ने के साथ ही हिमाचल पुलिस भी अलर्ट हो गई है। एडीजीपी कानून व्यवस्था संजय कुंडू ने बताया कि सभी जिलों के एसपी को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही होमगार्ड, पुलिस व फायर बिग्रेड के अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाकर स्थिति पर नजर रखने को कहा है। - फोटो : अमर उजाला

​रुद्रप्रयाग जंगलों में लगी आग ने चार वर्ष का रिकार्ड तोड़ दिया है। अब तक 45 घटनाओं में 97.20 हेक्टेयर जंगल राख हो चुके हैं। उत्तरी-दक्षिणी रेंज के जंगलों में दोबारा आग भड़कने से क्षेत्र में धुएं का गुबार फैला हुआ है। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के उत्तरी-दकणि रेंज जखोली, अगस्त्यमुनि, खांकरा और रुद्रप्रयाग के जंगलों की आग बुझने का नाम नहीं ले रही है।

कई स्थानों पर सप्ताहभर में दोबारा आग लग गई है। रविवार रात से तिलवाड़ा-मयाली और मयाली-गुप्तकाशी मार्ग से सटे जंगलों में भयानक आग भड़की हुई है। वनाग्नि का कहर थमने के बजाय, विकराल हो रही है। यहां वन संपदा जलकर राख हो रही है। आग की लपटों से छोटी वनस्पति से लेकर 20 से 30 फीट ऊंचे चीड़ के पेड़ों को जलाकर राख कर रही है।

वनाग्नि ने जिले में वर्ष 2012 का रिकार्ड तोड़ दिया है, तब फायर सीजन में 40 घटनाओं में 95 हेक्टेयर जंगल जले थे। इस बार, सरकारी आंकड़ों के मुतबिक ढाई माह में 100 हेक्टेयर क्षेत्र जलकर राख होने को हैं। कई स्थानों पर बांज-बुरांश जंगल में भी आग की चपेट में आ गए हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में चारापत्ती का संकट पैदा हो गया है।

प्रभागीय स्तर पर पांचों रेंज के जंगलों में आग लगी हुई है। कुछ स्थानों पर दोबारा आग की सूचना है। विभागीय स्तर पर अन्य विभागों की मदद से त्वरित इंतजाम के प्रयास हो रहे हैं। चीड़ के जंगलों में लीसा से अधिक नुकसान पहुंचा है, जिस कारण दावानल भड़क रही है।
- राजीव धीमान, डीएफओ रुद्रप्रयाग वन प्रभाग

जंगलों की आग से तीन ट्रांसफार्मर जलकर खराब
रुद्रप्रयाग के जंगलों में लगी आग से ऊर्जा निगम और बीएसएनएल की विद्युत व संचार लाइनों को भी क्षति पहुंची है। दावानल से अब तक तीन ट्रांसफार्मर जलकर खराब हो गए हैं। जंगलों की आग से तीन दिन में अगस्त्यमुनि ब्लाक के सेना-गड़सारी, अखोड़ी और पुलिस अधीक्षक आवास के समीप लगा विद्युत ट्रांसफार्मर जलकर खराब हो गए हैं।

बीना-चौकी और तूना-बौंठा मोटर पर खेड़ीखाल में दो किमी विद्युत लाइन भी पिघलकर नष्ट हो गई है। क्षेत्र के जंगलों में आग जारी होने से ऊर्जा निगम मरम्मत भी नहीं कर पा रहा है। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने बताया कि आग से विद्युत लाइनों व ट्रांसफार्मर के जलने से हादसे का भी खतरा है।

दूसरी तरफ जनपद में बीएसएनएल की अलग-अलग स्थानों पर ढाई किमी ओएफसी जल गई है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग से तिलवाड़ा के बीच 1.5 किमी, चोपड़ा में 100 मीटर और सतेराखाल क्षेत्र में आठ सौ मीटर ओएफसी दो दिन में आग की भेंट चढ़ चुकी है। जिला मुख्यालय सहित गांवों में बेस, मोबाइल और ब्रॉंडबैंड सेवा ठप हैं। निगम के एसडीओ केएस रावत ने बताया कि अंडर ग्राउंड लाइनें ठीक हैं। जहां लाइनें बाहर हैं, वहां आग से खतरा बना हुआ है।

मानव जनित है जंगलों की आग: अपर प्रमुख वन संरक्षक

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fire - फोटो : Amar Ujala

​अपर प्रमुख वन संरक्षक गंभीर सिंह ने कहा कि जंगलों में आग लगने का कारण मानव जनित है। इसको बुझाने के लिए विभाग की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। लंबा चौड़ा वन क्षेत्र होने और स्टाफ की कमी से आग पर काबू पाना चुनौती बना है।

सोमवार को पत्रकार वार्ता में अपर प्रमुख संरक्षक गंभीर सिंह ने कहा कि गढ़वाल में तीन वर्षों में जंगलों में काफी कम आग लगी। इससे जंगलों में काफी ज्वलनशील पदार्थ जमा है। इस साल बारिश काफी कम होने से जंगलों में आग तेजी से भड़क रही है। कहा कि जन जागरूकता से ही इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि गढ़वाल मंडल में करीब 12 लाख हेक्टेयर आरक्षित वन है। इसमें बीस प्रतिशत चीड़ के जंगल हैं। इन दिनों एक दिन में कई जगह आग लग रही है। जंगलों में भड़क रही आग बुझाने के लिए संविदा कर्मियों समेत सात हजार लोग तैनात हैं। क्षेत्रफल के लिए यह पर्याप्त नहीं है। अपर प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान भी आग पर काबू करने के लिए पूरे प्रयास कर रहे हैं। इस मौके पर गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ रमेश चंद्र भी मौजूद थे। 

आग को रोकने के लिए 1266अधिकारी- कर्मी तैनात
पौड़ी में जंगलों की आग को बुझाने के लिए विभिन्न विभागों के 1266 अधिकारियों व कर्मचारियों को तैनात किया गया है। सोमवार को जिलाधिकारी चंद्रशेखर भट्ट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रशासन आग से धधक रहे जंगलों को बचाने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। अब तक जहां-जहां आग लगी है वहां पर काबू पा लिया गया है।

डीएम ने बताया कि जिला मुख्यालय व आसपास के जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए वन विभाग के 622, राजस्व विभाग के 379, पुलिस व एसडीआरएफ के129, पीआरडी के 100 व एनडीआरएफ के 36 जवानों को तैनात किए गए हैं। आग बुझाने के लिए एक हेलीकाप्टर समेत 123 वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आग के चपेट में आने से मारी गई महिला व आठ घायलों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। इस मौके पर एसएसपी राजीव स्वरूप, डीएफओ रमेश चंद्र, एडीएम रामजी शरण, सीओ धनसिंह तोमर मौजूद थे।

उधर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने भी आग की घटनाओं को लेकर पत्रकार वार्ता की। उन्होंने बताया कि जंगलों की आग से जनहानि रोकने के लिए सभी थाना प्रभारियों को सचेत रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। एसएसपी ने बताया कि आग से निपटने के लिए सौ लीटर क्षमता के दो हाई प्रेशर वाटर मिस्ट कम सीएएफएस फायर फाइटिंग सिस्टम के दो वाहन मंगवाए गए हैं।

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