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उत्तराखंड में तबाही के बाद अब महामारी की दस्तक

Thu, 27 Jun 2013 12:38 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Thu, 27 Jun 2013 12:38 PM IST
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uttarakhand floods operation against epidemic

हिमालयन सुनामी से तबाही के बाद पहाड़ों पर अब महामारी का खतरा बढ़ गया है। शवों के सड़ने से महामारी से आशंकित स्वास्थ्य विभाग भी ने अब बीमारियों से निपटने की कवायद तेज कर दी है।

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रोकथाम के लिए रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और हरिद्वार में इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम शुरू किया है। आपदाग्रस्त जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। इस बीच राहत कार्य बारिश के चलते बाधित हुआ।
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बदरीनाथ धाम में अब भी साढ़े सात हजार से ज्यादा लोग फंसे हैं। इनमें लगभग साढ़े चार हजार तीर्थयात्री और बाकी स्थानीय लोग हैं।

उत्तराखंड तबाही की संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें


पहाड़ पर आई आपदा में इनसानों के साथ बड़ी संख्या में जीव-जंतु भी मरे हैं। इनमें रोडेंट्स की संख्या अधिक है। इससे डायरिया, वायरल फीवर, निमोनिया, फेफड़ों के संक्रमण के साथ प्लेग के फैलने का खतरा भी है।
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डॉक्टरों का कहना है कि अक्सर भूकंप, बाढ़, भूस्खलन सरीखी आपदा आने के बाद प्लेग का खतरा बढ़ता है। उत्तरकाशी में सात-आठ साल पहले प्लेग के मरीज मिलने की वजह से माना जा रहा है कि पहाड़ों पर प्लेग फैलाने वाला परजीवी हो सकता है।

तस्वीरों में: तबाही की निशानियां

राज्य में तीन स्थानों अलवलपुर (हरिद्वार), उडवी (उत्तरकाशी) और चंद्रपुरी (रुद्रप्रयाग) में डायरिया के मामले सामने आए हैं।

केंद्र सरकार ने महामारी पर नियंत्रण के लिए अब तक दो दल राज्य में भेजे हैं। नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम का एक विशेषज्ञ भी स्वास्थ्य विभाग में तैनात किया गया है। संभावित बीमारियों के पूर्वांनुमान के लिए जनपदों में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया गया है।

गौरीकुंड में चिकित्सीय सेवाएं देकर लौटे आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि आपदाग्रस्त क्षेत्रों में रोग फैल रहे हैं। गौरीकुंड में महामारी का सबसे अधिक खतरा है।


पढ़ें: मैं ‘पहाड़’ हूं, पीड़ा में हूं...


वहीं कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जेएस जोशी ने बताया कि महामारी रोकने के लिए बड़ी मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर, चूना, फिनायल भेजा गया है। टिहरी में डिपो बनाया गया है। केजीएमयू लखनऊ, फोर्टिस दिल्ली के चिकित्सा विशेषज्ञों की टीमें मुस्तैद हैं। इसके अलावा विभागीय चिकित्सकों की टीमें भी लगी हैं।

केंद्र की टीम
बीमारियों पर नियंत्रण के लिए दिल्ली से इमरजेंसी मेडिकल रिलीफ डायरेक्टर डॉ. पी रविंद्रन बुधवार शाम को देहरादून पहुंचे। उनके साथ राष्ट्रीय संक्रामक संस्थान के निदेशक डॉ. एलएस चौहान और राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रक कार्यक्रम के संयुक्त निदेशक डॉ. केएल गिल भी हैं।

अलोचना के बाद मोदी ने उत्तराखंड को दिए तीन करोड़ और
उठाए गए कदम
- अब तक 21000 किलो ब्लीचिंग, 10500 किलो चूना पाउडर भेजा।
- 14 लाख क्लोरीन की गोलियां आपदा प्रभावित क्षेत्रों को रवाना।
- 409 चिकित्सक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात।

पीडितों की मदद के लिए सेना ने लॉन्च की वेबसाइट

बचाव के लिए यह करें
-मानव और जानवरों के शवों पर ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव।
-फिनाइल के घोल का छिड़काव।
-पानी उबाल कर पिएं, खाना खुला न रखें।

ये रोग फैले हैं
वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, डायरिया, निमोनिया, सांस की एलर्जी, छाती का संक्रमण, टाइफाइड, शरीर की त्वचा का फटना, आंखों में लाली, चक्कर आना।

इनका भी खतरा
प्लेग, लैप्टोस्पायरोसिस, मलेरिया, गैस्ट्रोइंटाइटिस, कालाजार, वायरल इंसेफ्लाइटिस।

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