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एक माह में भी नहीं बदला केदार का दृश्य
संदीप थपलियाल
Updated Wed, 17 Jul 2013 08:52 AM IST
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केदारनाथ मंदिर परिसर में थोड़ा बहुत सफाई। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के चारों ओर रेत। मंदिर के पीछे बोल्डर और मलबा। जलप्रलय के ठीक एक माह बाद केदारनाथ मंदिर का यह दृश्य है। अभी तक मंदिर में सफाई के नाम पर शव हटाने के लिए की गई थोड़ा बहुत खुदाई।
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बर्बादी के निशान
केदारनाथ के ऊपर ग्लेशियर टूटने से मची तबाही के बाद केदारपुरी में बर्बादी के निशान छोड़ गई है। यह निशान एक माह बाद भी वैसे ही हैं। मंदिर के घंटों की गूंज और बाबा के जयकारों के बजाय सन्नाटा पसरा हुआ है। कभी-कभी पुलिस और एनडीआरएफ के जवानों की आपस की बातचीत सन्नाटे को तोड़ रही है।
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रात में सिर्फ एक कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनाई देती है, जो डराती भी है, तो यह सुकून भी देती है, चलो कोई है। 16 जुलाई से सावन शुरू हो गया है। शिव लिंग को जल और बेलपत्री चढ़ाने वाला भी कोई नहीं है।
मंदिर के बाहर स्थापित भगवान शिव के वाहन नंदी के चारों ओर मलबा है। गर्भगृह में स्वयंभू लिंग, जहां भक्त दूध-घी चढ़ाते थे, उसके चारों ओर लगभग दो फीट रेत जमा है। हालांकि पॉलीथिन और मंदिर परिसर से जूते चप्पल साफ कर दिए गए हैं।
मंदिर के अंदर और बाहर कुछ स्थानों पर पत्थर आगे-पीछे हो गए हैं। मंदिर के पीछे पता नहीं चल रहा कि छोटे-छोटे मंदिर मलबे में कहां दबे हैं। इसकी सफाई के लिए बहुत मेहनत करनी पडे़गी। मंदिर के पीछे बोल्डर खड़ा है। बताया जाता है कि इसी पत्थर ने मंदिर में पानी के साथ मलबा आने से रोका था। लोग इसे चमत्कार मानते हुए भैरवनाथ मान रहे हैं।
सावन के पहले सोमवार को जल चढ़ाएंगे
कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत मानते हैं कि मंदिर की सफाई जरूरी है। वे भी श्रमदान कर सफाई करेंगे। हर साल केदार की डोली ले जाने वाले रांसी के युवक शिव सिंह कहते हैं कि क्षेत्र के युवक मंदिर की सफाई करने को तैयार हैं। सावन के पहले सोमवार को वह जरूर भोले बाबा को जल चढ़ाएंगे।
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