{"_id":"e8bf557c-edcc-11e2-b9db-001e671f54a0","slug":"uttarakhand-floods-81","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक महीने पहले ऐसे मची थी केदारघाटी में तबाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक महीने पहले ऐसे मची थी केदारघाटी में तबाही
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2013 11:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
16 जून रात्रि 8:15 बजे
विज्ञापन
केदारनाथ मंदिर में आरती के बाद कुछ श्रद्धालु मंदिर परिसर में थे। कुछ होटल-लॉज में विश्राम कर रहे थे। रात्रि 8:15 बजे धाम में आवाज हुई और पानी का सैलाब मलबे-पत्थरों समेत प्रचंड वेग से मंदिर की ओर बढ़ने लगा। अधिकतर लोग मंदिर की शरण में भागे, जबकि कुछ दूसरे सुरक्षित स्थान तलाशने लगे।
जलप्रलय जैसे हालात दिखने लगे। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आने से कई श्रद्धालु इसमें बह गए। जबकि कई होटल और लॉज ताश के महल की तरह धराशायी हो गए। पूरे धाम में तबाही का माहौल था, जिसे देखते हुए बचे लोगों ने मंदिर में शरण ली और पूरी रात पानी और लाशों के बीच काटी।
विज्ञापन
17 जून सुबह 6:55 बजे:
रात भर मंदिर में शरण लेने के बाद सुबह 6:55 पर फिर से पानी के सैलाब में पूरा धाम तबाह हो गया। यह तबाही रात को हुए कहर से ज्यादा भयानक थी। जिसने पूरी केदारघाटी की तस्वीर ही बदल दी। जगह-जगह लाशें बिखरी थीं। बचे लोग दहशत में थे।
विज्ञापन
18 जून : केदारनाथ धाम में तबाही की सूचना मिलने पर रेस्क्यू कार्य शुरू। सेना ने शुरू किया आपरेशन सूर्या होप।
गंगोत्री घाटी लाइव
15 जून की रात मूसलाधार बारिश से असी गंगा व भागीरथी नदी में उफान आया। गंगोरी से लेकर उत्तरकाशी तक बाढ़ सुरक्षा कार्यों में लगी भारी मशीनें बाढ़ की भेंट चढ़ीं। गंगोत्री राजमार्ग अवरुद्ध होने पर हजारों तीर्थयात्री जगह-जगह फंसे।
राजमार्ग अवरुद्ध होने की कोई सूचना न मिलने पर 16 जून की सुबह विभिन्न पड़ावों से तीर्थयात्री फिर यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की ओर बढ़े, लेकिन जगह-जगह फंस कर रह गए।
16 जून की सुबह छह बजे से जिला मुख्यालय के पास उजेली व तिलोथ में बस्ती में भागीरथी से तेज हुआ कटाव। प्रात: सात बजे गंगोरी व गरमपानी के बीच राजमार्ग का करीब 50 मीटर हिस्सा कटकर भागीरथी में समाया। सुबह आठ बजे उजेली में संस्कृत महाविद्यालय का छात्रावास भवन ढहा।
पैदल आवाजाही भी हुई बंद
प्रात: दस बजे तिलोथ को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले मोटर पुल की एप्रोच ढहने से पैदल आवाजाही भी हुई बंद। दोपहर एक बजे तिलोथ वाले हिस्से में आधा दर्जन आवासीय भवन बाढ़ की भेंट चढ़े तथा नदी किनारे के सभी मकान खतरे की जद में आए। इसी समय उजेली में कैलाश आश्रम के दो शिव मंदिर बाढ़ में बहे।
16 जून की रात बारिश तथा नदियों में उफान का सिलसिला जारी रहने से तटवर्ती हिस्सों में रहा दहशत का माहौल। 16 जून की रात नाल्ड कठूड़ भटवाड़ी के स्याबा, पिलंग आदि गांवों के आसपास बादल फटे। रात दो बजे भटवाड़ी क्षेत्र की ओर से भागीरथी में बाढ़ की सूचना जिला मुख्यालय पहुंची। तटवर्ती आबादी में मची अफरा तफरी।
17 जून की सुबह 4 बजे से भागीरथी ने जिला मुख्यालय के आसपास शुरू की तबाही। तिलोथ पुल की एप्रोच ढहाने के साथ भागीरथी का पानी दीवार फाड़ कर घुसा वाल्मिकी बस्ती में। सुबह पांच बजे जोशियाड़ा में लोनिवि कालोनी ढह कर भागीरथी में समाई।
दर्जन से अधिक भवन बाढ़ की भेंट चढ़े
प्रात: छह बजे जोशियाड़ा में होटल आकाशगंगा के एक हिस्से समेत आगे के एक दर्जन से अधिक भवन बाढ़ की भेंट चढ़े। प्रात: साढ़े छह बजे जोशियाड़ा सड़क का करीब डेढ़ सौ मीटर हिस्सा और ऊपर की ओर के मकान ढहने शुरू हुए। जोशियाड़ा बैराज के ज्ञानसू वाले हिस्से में कटाव होने से इस बस्ती में भी दहशत फैली। जोशियाड़ा डूब क्षेत्र वाली बस्ती में भागीरथी का पानी घुसा।
10 बजते बजते होटल आकाश गंगा, देवलोक समेत कई मकान बाढ़ में बह गए। शाम पांच बजे बारिश थमी तथा भागीरथी के जलस्तर में कमी आने पर तबाही का सिलसिला थमा।
आपदा में विभागों को पहुंचा नुकसान
| विभाग | रुपये |
| लोक निर्माण | 735 करोड़ |
| ऊर्जा | 170 करोड़ |
| गृह | 13.5 करोड़ |
| वन | 39 करोड़ |
| पंचायती राज | 20 करोड़ |
| सहकारिता | 1.5 करोड़ |
| खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति | 6 लाख |
| माध्यमिक शिक्षा | 27 करोड़ |
| जलागम | 60 लाख |
| पंतनगर कृषि विवि | 3 करोड़ |
| महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास | 1.2 करोड़ |
| सूक्ष्म लघु एवं मध्ययम उद्यम | 1 करोड़ |
| पशुपालन डेयरी विकास | 1.5 करोड़ |
| ग्राम्य विकास | 78 करोड़ |
| तकनीकी शिक्षा | 15.5 करोड़ |
| उद्यान रेशम | 6 करोड़ |
| गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग | 228 करोड़ |
| सिंचाई | 226 करोड़ |
| शहरी विकास | 59 करोड़ |
| लघु सिंचाई | 60.7 करोड़ |
| कृषि | 10.5 करोड़ |
| युवा कल्याण | 45 लाख |
| राजस्व | 13 करोड़ |
| परिवहन | 1.5 करोड़ |
| कृषि एवं विपणन | 15.5 करोड़ |
| पशुपालन | 7 करोड़ |
| गृह कारागार | 70 लाख |
| पर्यटन विकास परिषद | 57.8 करोड़ |
| औद्योगिक विकास | 14 करोड़ |
| परिवहन एवं नागरिक उड्डयन | 82 लाख |
| चिकित्सा | 11 करोड़ |
| सूचना | 4 लाख |
| उच्च शिक्षा | 3.5 करोड़ |
| आयुष एवं आयुष शिक्षा | 33 लाख |
| खेल एवं युवा कल्याण | 26 लाख |
नुकसान
- आपदा से प्रभावित कुल गांव - 1603
- पूर्ण क्षतिग्रस्त पक्के मकान 1205
- आंशिक क्षतिग्रस्त पक्के मकान 2319
- पूर्ण क्षतिग्रस्त कच्चे मकान - 93
- आंशिक क्षतिग्रस्त कच्चे मकान - 590
- पशुशालाएं क्षतिग्रस्त - 649
- बड़े पशुओं (गाय, भैंस) का नकुसान - 686
- छोटे पशुओं (भेड़ बकरी) का नुकसान - 8833
- कुल नुकसान का अनुमान 1800 करोड़ से ज्यादा
(ये आरंभिक अनुमान हैं, आंकड़े घट-बढ़ सकते हैं)
--------------------------------
आपदा में कुल मृत : 580 (उत्तराखंड सरकार के आंकड़े)
कुल लापता : 5748
प्रदेश के लापता 924
दूसरे प्रदेशों के लापता : 4824
----------------
आपदा का क्या पड़ा था असर
2070 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं
1377 पेयजल योजनाएं ध्वस्त
गढ़वाल मंडल के पांच जिलों में जलसंकट
3758 गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप
------------------------------------
आपदा के एक माह बाद का हाल
गढ़वाल मंडल में 84 गांवों में बिजली बहाल नहीं
एक हजार से अधिक गांवों में बना है जलसंकट
405 मार्ग बंद होने से परेशानी में हैं सैकड़ों लोग
गढ़वाल मंडल के 232, कुमाऊं के 90 मार्ग तबाह
पीएमजीएसवाई की 83 सड़कें (दोनों मंडल)सड़कें ध्वस्त
पांच पहाड़ी जिलों की 374 पेयजल योजनाएं ध्वस्त
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें