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नई जगह करेंगे जिंदगी की शुरुआत
गोपेश्वर/ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2013 08:12 AM IST
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24 जुलाई की सुबह तक गुलजार तेफना गांव में अब खामोशी पसरने लगी है। यहां ग्रामीणों के घर, गौशाला और खेती तबाह होने के बाद ग्रामीण अपने घरों को छोड़ अन्यत्र ठौर ढूंढने लगे हैं।
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अभी तक गांव के करीब 12 परिवार गांव छोड़ अन्यत्र जा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है पानी के उस काल रूप को देखने के बाद अब गांव में रहने की हिम्मत हम नहीं कर पाएंगे। जब हमारा सब कुछ लुट गया है और हमें नए सिरे से शुरूआत करनी है, तो हम अब नई जगह पर ही नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे।
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तेफना गांव से अपने परिवार के साथ मंगरोली में रह रहे प्रेम सिंह का कहना है कि गदेरे का रुख अब गांव की ओर हो गया है, जिससे यहां रहना मुनासिब नहीं है। 24 जुलाई को तेफना-बांतोली गांव के पास से गुजर रहे गदेरे में बादल फटने से दोनों गांवों में काफी मची थी। तब से तेफना के बच्चे गदेरे में आए उफान को देखकर डरे हुए है।
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गांव छोड़ना मजबूरी
बच्चे नींद में उठकर बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगते हैं। ऐसे में गांव छोड़ना मजबूरी बन गया है। गांव के ही बल्लू लाल परिवार के पांच सदस्यों के साथ आपदा के बाद से खानाबदोशों की तरह कभी एक रिश्तेदार तो कभी दूसरे के घर शरण ले रहा है। उसका कहना है कि अब गांव जाने से भी डर लगता है। जो पानी का रूप देखा था, उसे देखने के बाद गांव में रहने की हिम्मत नहीं जुट पा रही है। ऐसे ही तेफना गांव के 12 परिवार अब अपने गांव को छोड़कर अन्यत्र जाने लगे हैं।
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