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उत्तराखंड आपदा: हरिद्वार से इलाहाबाद तक मिल चुके 65 शव
इलाहाबाद/गाजियाबाद/हरिद्वार/मेरठ/ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jul 2013 08:24 PM IST
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उत्तराखंड में हुई त्रासदी के निशान इलाहाबाद और आगे तक पहुंच रहे हैं। गंगा का प्रवाह बहुत तेज होने के चलते लाशें बहकर उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंच रही हैं।
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हरिद्वार से इलाहाबाद तक अब तक 65 शव मिल चुके हैं लेकिन उनमें अब तक हरिद्वार में केवल चार लाशों की पहचान हो सकी है।
पानी कम होने पर गंगा से दर्जनों शव निकलने की आशंका है। शवों को रोकने के लिए गंगा में न तो जाल लगाया गया है और न ही इन्हें रोकने की व्यवस्था है।
इस बीच गंगा में विभिन्न जगहों पर शवों की तलाश जारी है। आपदा के समय कहने को हरिद्वार में राज्य नियंत्रण कक्ष बनाया गया था लेकिन फिलहाल यहां पर अन्य राज्यों में मिलने वाले शवों की कोई जानकारी किसी को नहीं है।
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हरिद्वार में मिली 30 शवों में से 29 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। सिर्फ एक शव अंतिम संस्कार के लिए शेष है। सभी शवों का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा गया है।
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पुलिस को हरिद्वार में सेवा समिति का सहयोग मिला है, हालांकि ज्यादातर शवों का अंतिम संस्कार पुलिस ने थानों से चंदा एकत्रित कर किया। हरिद्वार में शवों की पहचान को लोग आते रहे हैं, हालांकि कई शव ऐसे थे जिनकी पहचान मुश्किल थी।
इलाहाबाद में अब तक 17 लाशें मिल चुकी हैं। करीब एक दर्जन लाशें ग्रामीणों ने देखीं जो अधिक बहाव की वजह से आगे निकल गईं। मेजा-माण्डा में सबसे अधिक लाशें मिली हैं।
झूंसी और सैदाबाद इलाके में गंगा से सात शव निकाले जा चुके हैं। सभी 17 लाशों को पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर एसपी सिंह ने बताया कि डीएनए मिलान के लिए रख लिया गया है।
छानबीन यह भी हो रही है कि उत्तराखंड आपदा की आड़ में कहीं आसपास लोगों के साथ कोई वारदात तो नहीं हुुई।
नरौरा बैराज, अनूपशहर और गढ़ क्षेत्र से पिछले 15 दिनों में 13 शव निकाले गए।
इनमें से एक की भी शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के साथ डीएनए और बिसरा रिपोर्ट सुरक्षित रखा है। पुलिस का कहना है कि डीएनए और बिसरा रिपोर्ट सुरक्षित रखने के बाद बृहस्पतिवार को तीनों शवों का संस्कार किया जाएगा। इसके अलावा शवों की पहचान के लिए फोटो कराई गई है और कपड़ों को भी संभाल कर रखा गया है।
पहाड़ों पर प्रलय के बाद गंगा में बहकर अब तक 15 लाशें बिजनौर और मुजफ्फरनगर तक पहुंच चुकी है। सभी का बिसरा व डीएनए कराकर अंतिम संस्कार किया गया है। शहीद भगत एकता मंच द्वारा इनका धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
डीएनए सैंपल का क्या होगा, तय नहीं
हरिद्वार। गंगा में मिले शवों का डीएनए तो सुरक्षित रख लिया गया है। लेकिन अब इनका करना क्या है, इसको लेकर स्थिति साफ नहीं हैं। कोई गाइडलाइन जारी नहीं होने के चलते फिलहाल यह डीएनए सैंपल जिला अस्पताल में ही रखे हुए हैं। सभी से डीएनए सैंपल के रूप लांग बोन (पैर अथवा हाथ की हड्डी) रखी गई है।
जिला अस्पताल के कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक डा. राजेश गुप्ता का कहना है कि सभी डीएनए सुरक्षित हैं, इनको लेकर फिलहाल कोई गाइडलाइन नहीं मिली है।
यह है प्रक्रिया
डीएनए जीवधारियों के शरीर में पाई जाने वाली एक जटिल संरचना है। यह किसी का पितृत्व अथवा मातृत्व साबित करने की सबसे सटीक विधि है। हर बच्चे का डीएनए अपने माता-पिता से मिलता है।
आपदा प्रकरण में सभी शवों के डीएनए का डाटा तैयार किया गया है। इसके बाद शव पर दावा करने वाले का व्यक्ति का डीएनए लेकर दिल्ली अथवा हैदराबाद स्थित लैब भेजा जाएगा।
वहां से डीएनए की रिपोर्ट मिलने के बाद शवों के डीएनए डाटा से मिलान किया जाएगा। जिसका डीएनए मैच करेगा, शव पर उसका दावा माना जाएगा।