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हाथ से छिटककर बह गई बिटिया और पत्नी
ऋषिकेश/ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2013 12:55 AM IST
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कानपुर निवासी सौरभ भट्ट की आंखें पत्नी रश्मि और नौ साल की बिटिया आस्था की राह ताकते-ताकते पथरा गई हैं। मन के किसी कोने में विश्वास है, वे जरूर लौट आएंगी।
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सौरभ बस अड्डे पर निर्मल आश्रम कैंप के मुख्यद्वार पर कुर्सी लगाकर अपनी पत्नी और बेटी का इंतजार करते हुए कभी-कभी गहरी सोच में डूब जाते हैं। कहते हैं, भगवान ही जाने आगे क्या होगा।
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बोले, पत्नी और दो बच्चों के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। 16 की सुबह केदारनाथ पहुंच गए थे। हमने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए तब तक शाम हो चुकी थी। किसी ने बताया कि रामबाड़ा में पुल टूट जाने के कारण रास्ता बंद है, इसलिए वे रात को वहीं रुक गए।
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17 की सुबह वे वापस लौटने के लिए मंदिर से लगे हुए ट्रस्ट कार्यालय के बाहर पूरे परिवार सहित खड़े थे। अचानक तीव्र गति से पानी आया और सभी लोग बहने लगे। मेरे समीप एक बड़ा सा पत्थर आकर रुक गया, जिसकी ओट से मैं पानी के तेज बहाव से बच गया। मगर, तेज बहाव में पत्नी और दोनों बच्चों को नहीं बचा पाया।
वे हाथ से छिटककर उनकी आंखों के सामने बहने लगे। मेरी चीख सुनकर किसी व्यक्ति ने उनके बेटे कार्तिकेय को ऊपर खींच लिया, मगर पत्नी और बेटी बह गई। मैं दूर तक उनको बहता देखता ही रह गया। चार घंटे तक कमर तक मलबे में फंसा रहा। पानी कुछ कम हुआ तो जिंदा बचे लोगों ने बमुश्किल मुझे बाहर निकाला। दर्द की हालत में तीन दिन तक भूख प्यासे में गुजारे। जैसे-तैसे ऋषिकेश पहुंचा।